shadishuda purush ka kisi mahila ke sath live in me rahna apradh nahi girftari par high court ki rok शादीशुदा पुरुष का किसी महिला के साथ लिव इन में रहना अपराध नहीं, गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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शादीशुदा पुरुष का किसी महिला के साथ लिव इन में रहना अपराध नहीं, गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला की सहमति से उसके साथ लिव-इन में रहता है, तो यह अपराध नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून और नैतिकता को अलग रखा जाना चाहिए। 

Sat, 28 March 2026 12:47 PMYogesh Yadav प्रयागराज, विधि संवाददाता
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शादीशुदा पुरुष का किसी महिला के साथ लिव इन में रहना अपराध नहीं, गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिवइन संबंध में रहता है, तो यह किसी भी प्रकार का अपराध नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और नैतिकता को अलग-अलग रखा जाना चाहिए और सामाजिक धारणा अदालत के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक लिवइन जोड़े ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी।

मामले के अनुसार, महिला के परिवार ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता, जो पहले से विवाहित है, उसने 18 वर्षीय युवती को बहला-फुसलाकर अपने साथ रखा है। परिवार का यह भी कहना था कि शादीशुदा होने के बावजूद किसी अन्य महिला के साथ रहना अपराध है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि“ऐसा कोई अपराध नहीं है जिसमें एक विवाहित पुरुष, किसी वयस्क के साथ उसकी सहमति से लिव-इन संबंध में रहने पर अभियोजित किया जा सके। कानून और नैतिकता को अलग रखना आवश्यक है।”

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कोर्ट ने कहा कि महिला ने शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर बताया है कि वह बालिग है और अपनी इच्छा से याचिकाकर्ता के साथ रह रही है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आशंका जताई कि महिला का परिवार इस संबंध के खिलाफ है और उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है, जिससे ऑनर किलिंग का खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके, पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि दो बालिग व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का मूल कर्तव्य है। कोर्ट ने राज्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय दिया गया।

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अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक शाहजहांपुर के जैतीपुर थाना में दर्ज मामले में याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने महिला के परिवार और सूचक को याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक हानि पहुंचाने से रोक दिया। साथ ही, उन्हें सीधे या किसी माध्यम से संपर्क करने या उनके घर में प्रवेश करने से भी प्रतिबंधित किया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

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