वे हमको जाल में फंसाना चाहते हैं, माघ मेला छोड़ने से पहले योगी सरकार पर जमकर बरसे अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमको लगा कि अब यहां पर बैठना ठीक नहीं है। इनकी नीयत पछतावे या अपने अपराध को स्वीकार करने की नहीं है। ये अभी भी अपनी अकड़ पर ही रहना चाहते हैं। केवल सरकारी रेवड़ी बांटकर यह हमको अपने जाल में फंसाना चाहते हैं इसलिए हमने निर्णय लिया कि हम तत्काल यहां से निकल जाएं।

मौनी अमावस्या पर संगन स्नान को जाते समय पालकी रोके जाने और बटुक शिष्यों के अपमान के खिलाफ पिछले 10 दिन से अपने शिविर के बाहर बैठे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को माघ मेला छोड़ काशी के लिए प्रस्थान किया। इसके पहले प्रशासन द्वारा उन्हें मनाने की कोशिश के तौर पर कुछ प्रस्ताव दिए गए जिन्हें उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। शंकराचार्य ने कहा कि हमको लगा कि अब यहां पर बैठना ठीक नहीं है। इनकी नीयत अभी भी पछतावे या अपने अपराध को स्वीकार करने की नहीं है। ये अभी भी अपनी अकड़ पर ही रहना चाहते हैं। केवल सरकारी रेवड़ी बांटकर यह हमको अपने जाल में फंसाना चाहते हैं इसलिए हमने निर्णय लिया कि हम तत्काल यहां से निकल जाएं। उन्होंने कहा कि किसकी जीत है और किसी हार है, यह समय बताएगा। यह सनातन धर्म की जनता है। अभी इसको अपना निर्णय लेना बाकी है। सनातनी जब निर्णय लेगा तब हार-जीत की घोषणा होगी।
एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन ने हमसे क्षमा नहीं मांगी, वो तो हमको रेवड़ी देना चाहता है, सहूलियत देना चाहता है और मामले को ठीक करना चाहता है। जो अपराध किया है उसके बारे में चर्चा नहीं करना चाहता। शंकराचार्य ने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा दु.ख यही मिला है। इसके पहले बहुत से दु:ख हुए लेकिन सब दु:ख छोटे हो गए। यह जो प्रयागराज की धरती पर योगी सरकार द्वारा दुख मिला वो सबसे बड़ा दु:ख सनातनधर्मियों को हो गया। अब इस दु:ख की भरपाई पता नहीं कौन नेता आएगा और कौन सी पार्टी आएगी और करेगी, यह तो समय ही बताएगा।
प्रशासन द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर विस्तार से बताते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-‘प्रशासन और सरकार ने जो प्रस्ताव भेजा, आप बताइए वो हमको सुविधा दे रहे हैं कि आपको हम पालकी में ले जाकर नहलाएंगे। क्यों नहलाओगे, जब हमारा पालकी में तुम्हारी तरफ से जाना गलत था तो क्यों ले जाओगे? दूसरे हम आगे के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए एसओपी बनाते हैं, तो जब तुम यह बना सकते तो पहले क्यों नहीं किया? और जो मारपीट, अपमान किया है, उसके बारे में एक शब्द नहीं।
इसका मतलब कि मारपीट करवाकर बच्चों का हम माहौल बनाएं और अपनी सुविधा ले लें। यह हमारी अंतरात्मा को कितनी चोट पहुंचा रहे हैं अपने प्रस्ताव से। क्या इस प्रस्ताव को कोई भी चेतनावान व्यक्ति स्वीकार कर सकता था? इसलिए हमको लगा कि अब देर नहीं करना चाहिए। तत्काल यहां से निकलना चाहिए क्योंकि ये लोग हमको लोभ-लालच देकर हमारी जो टेक है, जो हमारे मन में पीड़ा है कि सनातन धर्मियों को मारा-पीटा गया उससे ये हमें विरत करना चाहते हैं।’




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