पूर्व MLC दीपक सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया, शंकराचार्य के समर्थन में जा रहे थे प्रयागराज
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में प्रयागराज जाने के लिए निकले पूर्व एमएलसी दीपक सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें गौरीगंज गेस्ट हाउस लाया गया है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में प्रयागराज जाने के लिए निकले पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) दीपक सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें गौरीगंज गेस्ट हाउस लाया गया है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। गेस्ट हाउस के बाहर गौरीगंज, जामो और मुंशीगंज थानों की पुलिस के साथ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
पूर्व एमएलसी दीपक सिंह ने हिरासत में लिए जाने के बाद कहा कि शंकराचार्य के साथ सरकार अन्याय कर रही है। इसी के विरोध और उनके समर्थन में वे प्रयागराज जा रहे थे, लेकिन उन्हें जगह-जगह पुलिस द्वारा रोका गया। इसके बाद उन्हें जबरन गौरीगंज गेस्ट हाउस लाया गया। दीपक सिंह ने कहा कि देश में कहीं भी जाना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार उस अधिकार का दमन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। गेस्ट हाउस परिसर और आसपास के इलाकों में किसी भी तरह की भीड़ एकत्र न हो, इसके लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है। वहीं, उपजिलाधिकारी (एसडीएम) प्रीति तिवारी पूर्व एमएलसी दीपक सिंह से वार्ता करने के लिए गेस्ट हाउस पहुंचीं और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने का प्रयास किया। घटना को लेकर जिले के राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। समर्थकों में रोष देखा जा रहा है, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस और प्रशासन की नजर बनी हुई है।
बिना संगम स्नान के वापस लौटे शंकराचार्य, काशी के लिए हुए रवाना
मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में हुई कथित मारपीट की घटना को लेकर जारी विवाद के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया। वह काशी के लिए रवाना हो गए। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मन अत्यंत दुखी होने के कारण वह बिना संगम स्नान किए ही काशी लौट रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रयागराज सदैव आस्था और शांति की भूमि रही है। श्रद्धा के साथ यहां आए थे, लेकिन एक ऐसी घटना घटित हुई जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। इस घटना ने उनकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया है और न्याय व मानवता के प्रति उनका विश्वास कमजोर हुआ है।




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