Relief for UP electricity consumers, bills will be reduced by 1.52 percent in May यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत, मई में बिल इतने प्रतिशत कम आएगा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत, मई में बिल इतने प्रतिशत कम आएगा

यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। मई का बिजली बिल 1.52 प्रतिशत कम आएगा। पावर कॉरपोरेशन ने बुधवार को ईंधन अधिभार शुल्क की दरें जारी कर दी हैं, जो गणना के बाद ऋणात्मक पाई गई।

Wed, 29 April 2026 07:09 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत, मई में बिल इतने प्रतिशत कम आएगा

UP News : उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। मई का बिजली बिल 1.52 प्रतिशत कम आएगा। पावर कॉरपोरेशन ने बुधवार को ईंधन अधिभार शुल्क की दरें जारी कर दी हैं, जो गणना के बाद ऋणात्मक पाई गई। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को कुल मिलाकर लगभग 118 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। आम तौर पर ईंधन अधिभार बिजली उत्पादन की लागत में उतार-चढ़ाव के आधार पर जोड़ा या घटाया जाता है। इस बार यह शुल्क घटा है, जिससे बिजली बिल में कमी आई है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। फरवरी में हुई 10 प्रतिशत की ज्यादा वसूली और पुरानी औसत बिलिंग दर पर कई महीने तक हुई वसूली के खिलाफ उपभोक्ता परिषद की लड़ाई जारी रहेगी। उपभोक्ताओं से हुई अतिरिक्त वसूली उन्हें वापस करनी पड़ेगी। उन्होंने एक बार फिर नियामक आयोग से मांग की है कि उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये बिजली कंपनियों पर बकाया रहते हुए अधिभार की वसूली न हो। अधिभार की दरें ऋणात्मक रहने पर ही उन्हें प्रभावी माना जाए अन्यथा उस रकम की भरपाई 51 हजार करोड़ रुपये से हो। उपभोक्ता परिषद ने अधिभार गणना के मौजूदा फार्मूले की समीक्षा करवाने की भी मांग की है। उपभोक्ता परिषद के मुताबिक इस फार्मूले से उपभोक्ताओं को नुकसान होता है।

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प्रीपेड मीटर मामले में उपभोक्ता परिषद ने खोला रखा है मोर्चा

वहीं , स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी। याचिका में कहा गया है कि प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म होने की संशोधित अधिसूचना के बाद भी यूपी में प्रीपेड मीटर के साथ ही नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं। यह केंद्रीय कानून का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि अनिवार्य तौर पर प्रीपेड मीटर के साथ नया कनेक्शन देकर पावर कॉरपोरेशन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की अधिसूचना और विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) की व्यवस्था के खिलाफ काम कर रहा है। सीईए की अधिसूचना और विद्युत अधिनियम उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का विकल्प देते हैं। वहीं, बीते साल सितंबर के बाद से पावर कॉरपोरेशन ने प्रीपेड मीटर के साथ ही नया कनेक्शन देना अनिवार्य कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि नई अधिसूचना एक अप्रैल 2026 को जारी हुई थी। उस अधिसूचना के बाद प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बताने वाली अधिसूचना स्वत: समाप्त हो गई।

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