यूपी में लाल टोपी आतंक का प्रतीक है; सुब्रत पाठक का अखिलेश यादव पर पलटवार
अखिलेश यादव और भाजपा पूर्व सांसद सुब्रत पाठक के बीच सोशल मीडिया पर सियासी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं के एक-दूसरे पर किए गए तीखे बयानों से जिले की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। अब सुब्रत पाठक ने कहा है कि यूपी में लाल टोपी आतंक का प्रतीक है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक के बीच सोशल मीडिया पर सियासी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं के एक-दूसरे पर किए गए तंज और तीखे बयानों से जिले की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। शुक्रवार को अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पर काले चश्मे वाले तंज के बाद अब पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने भी सोशल मीडिया पर पलटवार किया है।
पूर्व सांसद सुब्रता पाठक ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स और मेटा पर लिखा, 'काला चश्मा आंखों को धूप से ठंडक देता है जिससे पहनने बाले की नजर पैनी बनी रहती है, किंतु लाल टोपी उत्तर प्रदेश में आतंक की प्रतीक है और इन टोपी बाजों की टोपी का रंग भले ही लाल हो किंतु ये जाने तो काले कारनामों के लिए ही जाते हैं, कोई सपा अध्यक्ष को समझाये कौआ नाक ले गया ये सुनकर केबल कौए के पीछे मत भागो पहले अपनी नाक तो देख लो सुरक्षित है की नहीं, अतः ख़ुद का ट्वीट किया पूरा वीडियो तो सुनो फिर बताओ उसमें आख़िर गलत क्या है?'
दरअसल, बीते दिनों एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सांसद पाठक ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एसआईआर अभियान को समाजवादी पार्टी के लिए घातक बताया था। उन्होंने दावा किया था कि यह अभियान सपा के ताबूत पर आखिरी कील साबित होगा और पार्टी भविष्य में दूरबीन लगाकर ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने कन्नौज की तीन विधानसभा सीटों में करीब तीन लाख वोट कटने की बात कही थी। सुब्रत पाठक ने यह भी कहा था कि एसआईआर से भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि हर बूथ पर फर्जी वोट मौजूद हैं और कार्रवाई उन्हीं पर की जाएगी।
अखिलेश ने सुब्रत पाठक पर कसा तंज
सुब्रत पाठक के इस बयान के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पूर्व सांसद का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे बेहद आपत्तिजनक और लोकतंत्र के खिलाफ बताया। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया था कि क्या पूर्व भाजपा सांसद जायज और वैध मतदाताओं के वोट कटवाने की बात कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से इस बयान का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की मांग भी की। अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में व्यंग्यात्मक लहजे का इस्तेमाल करते हुए लिखा था कि पूर्व भाजपाई सांसद अपने कारनामों का काला चश्मा लगाए हुए यह भूल गए हैं कि वे जो कह रहे हैं, वह उनकी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के बयानों के विपरीत है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि जैसे ही यह बात मुख्यमंत्री के संज्ञान में आएगी, वे उनकी क्लास लगा देंगे। इसके अलावा उन्होंने दूरबीन वाले कटाक्ष का जिक्र करते हुए लिखा था कि अगर वहां से बच भी गए, तो दूर बैठे लोग इन्हें बुला लेंगे, क्योंकि दूरबीन से जुड़े संवादों पर उनका एकाधिकार है। अखिलेश ने यह भी कहा था कि ऐसे बयान देने वाले लोग अब यह सोचते फिरेंगे कि वे किससे बचें चुनाव आयोग से, लखनऊ से या फिर दिल्ली से। अब दोनों नेताओं के बीच जारी इस सियासी बयानबाज़ी से जिले की राजनीति में हलचल मची हुई है। वहीं सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।




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