सिविल जज के पदों पर प्रमोशन कोटा बदला, योगी कैबिनेट ने सेवा नियमावली में संशोधन दी मंजूरी
यूपी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 से कम कर 50 प्रतिशत कर दिया है। योगी कैबिनेट में न्यायिक सेवा नियमावली 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

योगी सरकार ने न्यायिक सेवा पदोन्नति कोटे में बदलाव कर दिया है। श्रेष्ठता-सह ज्येष्ठता और उपयुक्तता परीक्षा पास कर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 से कम कर 50 प्रतिशत कर दिया है। इसी पद पर श्रेष्ठता के आधार पर पदोन्नति का कोटा 10 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला हुआ। इसके लिए उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली 2026 लागू की जाएगी। इसके तहत भर्ती, कोटा और चयन प्रक्रिया से नियमों में बदलाव किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर तथा उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।
खनन की ई-निविदाओं के लिए एमएसटीसी लिमिटेड का प्लेटफॉर्म होगा इस्तेमाल
योगी कैबिनेट ने मंगलवार को मुख्य खनिजों की ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रियात्मक कार्रवाई के लिए एमएसटीसी लिमिटेड को नीलामी प्लेटफॉर्म प्रदाता नामित किया है। इसके अतिरिक्त एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड को निविदाओं में ट्रांजेक्शन सलाहकार नामित किया गया है। एमएसटीसी लिमिटेड केंद्र सरकार के खान मंत्रालय और सात राज्यों में नीलामी प्लेटफॉर्म प्रदाता के रूप में काम कर रहा है। वहीं, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स केंद्र सरकार के खान मंत्रालय के अलावा 16 प्रदेशों में ट्रांजेक्शन सलाहकार के रूप में काम कर रहा है। एसबीआई कैपिटल के साथ हुआ पिछला अनुबंध इस साल फरवरी में समाप्त हो चुका है। कैबिनेट ने इसे एक साल के लिए और बढ़ा दिया है।
दो लाख शिक्षक व कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा
राज्य विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों व स्वावित्तपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। राज्य विश्वविद्यालयों व एडेड डिग्री कॉलेजों में नियमित पाठ्यक्रमों के साथ-साथ स्वावित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों व कर्मियों को भी इसका लाभ मिलेगा। कुल दो लाख से अधिक शिक्षक व कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। मंगलवार को कैबिनेट ने उच्च शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। शिक्षकों, कर्मचारियों व उनके परिजनों को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष शिक्षकों को ही कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कर्मचारियों को भी इसमें जोड़ दिया गया है। ऐसे में अब शिक्षक, कर्मचारी व उनके परिजनों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा।




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