स्नान-पर्व में राजनीतिक लोगों का प्रभाव..., स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर मायावती ने तोड़ी चुप्पी
प्रयागराज माघ मेला में स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की नाराजगी और शासन-प्रशासन से विवाद पर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने चुप्पी तोड़ी है। मायावती ने राजनीति और धर्म के घालमेल पर प्रहार किया है।

प्रयागराज के माघ मेला में गंगा स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शासन-प्रशासन के बीच जारी गतिरोध पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुप्पी तोड़ी है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए धर्म और राजनीति के घालमेल पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने प्रयागराज के विवाद को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ का परिणाम बताया है।
मायावती ने लिखा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी धर्म के पर्व, त्योहार, पूजा-पाठ और स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा, "यह बढ़ता प्रभाव नए-नए विवादों, तनाव और संघर्षों का कारण बन रहा है, जो बिल्कुल सही नहीं है। इन सब बातों को लेकर आम जनता में दुख और चिंता की लहर होना स्वाभाविक है।"
राजनीति और धर्म को जोड़ने के खतरे
बसपा प्रमुख ने सीधे तौर पर प्रयागराज विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से जोड़ने के हमेशा खतरे बने रहते हैं। उन्होंने कहा, "प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा विवाद, एक-दूसरे का अनादर और आरोप-प्रत्यारोप इसका ताज़ा उदाहरण है। इससे हर हाल में बचा जाना ही बेहतर है।"
संविधान और 'वास्तविक राष्ट्रीय धर्म' की नसीहत
मायावती ने राजनेताओं को उनके संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाते हुए कहा कि देश का संविधान और कानून जनहित व जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक 'राष्ट्रीय धर्म' मानता है। संविधान राजनीति को धर्म से दूर रखने की सीख देता है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि राजनेता बिना किसी द्वेष और पक्षपात के सर्वसमाज के हित में काम करें। उन्होंने अपील की कि प्रयागराज का यह 'कड़वा विवाद' आपसी सहमति से जितनी जल्दी सुलझ जाए, उतना ही बेहतर होगा।
'उत्तर प्रदेश दिवस' की शुभकामनाएं
अपने बयान के अंत में मायावती ने प्रदेशवासियों को 'उत्तर प्रदेश दिवस' की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने संदेश दिया कि प्रदेश की प्रगति के लिए संवैधानिक मूल्यों और आपसी सद्भाव का बने रहना अनिवार्य है।




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