पापा ने दोनों दीदियों को चाकू से काट दिया, तुम उस कमरे में मत जाना; बुआ से बोला 6 साल का गुन्नू
कानपुर की जुड़वा बहनों की हत्या के बाद से उनका 6 साल का भाई गुन्नू अभी भी सदमे में है। जब उसकी बुआ घर पहुंची तो उनसे बोला कि पापा ने दोनों दीदियों को चाकू से काट डाला है, तुम उस कमरे में मत जाना। अभी भी यही पूछ रहा है कि मेरी दीदियां कहां गईं।

बुआ...मेरी दोनों दीदी को पापा ने चाकू से काट दिया है, तुम भी उस कमरे में मत जाना तुम्हें भी काट देंगे। ये शब्द छह साल के मासूम रुद्रव उर्फ गुन्नू ने घटना के बाद घर आई अपनी रिश्ते की बुआ स्वास्तिका से कहे। जो घटना के बाद से डरा और सहमा है। मां रेशमा ने बताया कि गुन्नू जब सोकर उठा, तब पुलिस बेटियों के शव प्लास्टिक बैग में सील कर ले जा रही थी। इसके बाद उसने कमरे में खून से सने बिस्तर देखे। इस पर पूछने लगा कि मां, मेरी दीदियां कहां गईं। उससे लगातार सच छिपाने की कोशिश की गई लेकिन घर में पुलिस, मीडिया और लोगों के आने जाने का सिलसिला थमा नहीं। जिससे उसे पूरी घटना पता चल गई। इसके बाद वो रात भर नहीं सोया। उठ-उठ कर बिलखता रहा। कभी रिद्धि दीदी तो कभी सिद्धि दीदी बुलाता रहा।
नहीं जला चूल्हा, बेटे को मंगाया ऑनलाइन सैंडविच
घटना ने रेशमा के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार शाम तक बेटियों के अंतिम संस्कार में व्यस्त रहने के बाद सोमवार को दिन भर खाना नहीं बना। रेशमा बेटियों की मोबाइल पर तस्वीरें देख कर बिलखती रही। बेटा रुद्रव भूख लगी होने की बात कहने लगा, इसपर उसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप से सैंडविच मंगा कर खिलाया। हालांकि इस दौरान अपार्टमेंट में किसी ने भी परिवार से संपर्क नहीं किया न ही कोई खाना लेकर आया।
मुझे शर्म आती है, शशिरंजन मेरा भाई है- स्वास्तिका
वीभत्स घटना के बाद से रेशमा ही नहीं बनारस से कानपुर आई बुआ की बेटी स्वास्तिका के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्वास्तिका ने बताया कि शशिरंजन वर्ष 2000 में कानपुर आ गया था, उसकी कमाई भी ठीक होने लगी, इसलिए किसी से मतलब नहीं रखता था। अगर परिवार वाले बात करने का प्रयास करते तो उनसे गाली गलौज करता। मुझे तो पता ही नहीं था कि कानपुर में मेरा कोई भाई है। हालांकि वर्ष 2014 में जब रेशमा भाभी से शादी की तो वीडियो कॉल पर एक-दो बार बात हुई, लेकिन शशि रंजन को बात करना पसंद नहीं आया। इसीलिए सभी ने बात करना छोड़ दिया। मुझे तो शर्म आती है कि शशि रंजन से मेरा कोई रिश्ता है।
गया में परिवार संग रहते पिता
मूलरूप से वाराणसी के पहाड़िया इलाके का निवासी शशिरंजन मिश्रा का परिवार बिहार के गया जिले में रहा करता था। उसके पिता शेखर मिश्रा वहां पीएचई डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। वहां से करीब आठ वर्षों पहले शशिरंजन कानपुर आया था। यहीं उसने प्रेम विवाह किया। वह त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में ग्राउंड फ्लोर पर विवेक गुप्ता के फ्लैट में पत्नी रेशमा छेत्री, 11 वर्षीय जुड़वां बेटियों रिद्धि-सिद्धि और छह साल के बेटे रुद्र उर्फ गुन्नू के साथ रह रहा था। रविवार को शशिरंज ने अपनी बेटियों को चापड़ से काट डाला था।




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