OP Rajbhar s pressure politics before Panchayat elections met Yogi will also meet Modi पंचायत चुनाव से पहले ओपी राजभर की दबाव की राजनीति, योगी से मिले, मोदी से भी मिलेंगे, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पंचायत चुनाव से पहले ओपी राजभर की दबाव की राजनीति, योगी से मिले, मोदी से भी मिलेंगे

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने पंचायत चुनाव से पहले बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है। उन्होंने कोटे में कोटा का राग छेड़ दिया है। 20 साल पहले बनी समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग करते हुए सीएम योगी से मुलाकात की और पीएम मोदी से मिलने की बात कही है।

Fri, 4 July 2025 09:55 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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पंचायत चुनाव से पहले ओपी राजभर की दबाव की राजनीति, योगी से मिले, मोदी से भी मिलेंगे

उत्तर प्रदेश सरकार में सहयोगी सुभासपा अध्यक्ष औ योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव से पहले दबाव की राजनीति शुरू कर दी है। शुक्रवार को वह मुख्यमंत्री आवास में सीएम योगी से मिले और कोटे में कोटा का पुराना राग छेड़ दिया है। उन्होंने पिछड़ा और अनुसूचित वर्ग को मिलने वाले आरक्षण में बंटवारे की मांग सीएम योगी से कर दी। यही नहीं, अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी यह प्रस्ताव रखने दिल्ली जाएंगे। सीएम योगी से मुलाकात के समय ओपी राजभर के बेटे और सुभासपा के महासचिव अरुण राजभर भी मौजूद रहे।

राजभर ऐसे समय योगी से मिले और कोटे में कोटे की मांग रखी, जब तीन दिन पहले ही उन्होंने अखिलेश यादव को उनकी तस्वीर के साथ अलग तरह से जन्मदिन की बधाई दी थी। इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजभर पिछले दो विधानसभा चुनाव के दौरान तीन बार पाला बदल चुके हैं। 2017 में राजभर भाजपा के साथ थे। योगी की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। इसके बाद भी ऐसी स्थिति बना दी कि योगी ने उनको बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद 2022 का चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ा लेकिन खास सफलता नहीं मिलने पर दोबारा बीजेपी के करीब आएं और एक बार फिर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने में सफल हो गए।

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पंचायत चुनाव में अति पिछड़ों के मिले अलग आरक्षण

ओपी राजभर ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी और अनुसूचित जाति आरक्षण में अति व सर्वाधिक पिछड़ी जातियों को अलग से कोटा दिए जाने की मांग की है। राजभर का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी और अनुसूचित जाति में अति व सर्वाधिक पिछड़ी जातियों के लिए अलग से सीटें आरक्षित किया जाना समय की मांग है। मौजूदा व्यवस्था में इन जातियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। आरक्षण का लाभ ओबीसी और एससी की कुछ चुनिंदा जातियों के लोग उठा रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण पुलिस भर्ती परीक्षा भी है। 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ 19000 से ज़्यादा ओबीसी की मजबूत जातियों ने ही उठाया है।

क्या है कोटे में कोटा

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण में बंटवारे के उद्देश्य से सामाजिक न्याय समिति का गठन किया था। इस समिति की रिपोर्ट में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को तीन भागों में बांटने की सिफारिश की है। इसमें पिछड़ी जाति को कोटे को तीन भागों पिछड़ी जाति, अति पिछड़ी जाति और सर्वाधिक पिछड़ी जाति में बांटने की सिफारिश की गई है। 27 में से सात प्रतिशत कोटा 16 पिछड़ी जातियों को देने की सिफारिश की गई है। इसी तरह अति पिछड़ी जातियों के लिए नौ प्रतिशत कोटा प्रस्तावित है। इसमें 32 जातियों को रखा गया है। इसके अलावा सबसे अधिक 11 प्रतिशत कोटा सर्वाधिक पिछड़ी जातियों के लिए है रखने की बात है। इसमें 57 पिछड़ी जातियों को रखा गया है।

राजभर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति के आरक्षण कोटे के उपवर्गीकरण का आदेश भी दिया है। यह भी होना चाहिए। राजभर का कहना है कि कोटें में कोटा निर्धारित करने के लिए विधानमंडल में प्रस्ताव लाकर कानून बनाने की जरूरत पड़ेगी। सरकार को इसके लिए राजी कराने की पूरी कोशिश की जाएगी।

राजनाथ सिंह की सरकार में बनी थी समिति

सुभासपा अध्यक्ष और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2001 में हुकुम सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय समिति का गठन इस आशय से किया गया था कि उत्तर प्रदेश में अन्य पिछडा वर्ग को मिल रहे 27% आरक्षण में बंटवारा कर पिछड़े वर्ग के वंचित शेष सभी जातियों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाय। उक्त समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसके बाद ही तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया। इससे उक्त समिति की रिपोर्ट प्रदेश में लागू नही हो सकी।

उसके बाद बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की सरकार 2017 तक रही लेकिन न तो 27% आरक्षण में बंटवारा किया गया और न ही सामाजिक न्याय समिति की उपरोक्त रिपोर्ट लागू की गयी। 2017 मे फिर से भाजपा की सरकार बनी और उत्तर प्रदेश सरकार ने माननीय न्यायमूर्ति राघवेन्द्र सिंह (सेनि) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सामाजिक न्याय समिति का गठन किया। इस समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मे यह सुझाव दिया है कि पिछड़ा वर्ग को दिए जाने वाले 27% आरक्षण को तीन भागो मे बांटकर इसका लाभ पिछडा वर्ग को 7%, अतिपिछडा वर्ग को 9%, और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को 11% आरक्षण का लाभ दिया जाय और इसे लागू किये जाने के लिए अपनी संस्तुति सहित रिपोर्ट सरकार के सामने प्रस्तुत की है।

कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में पीठ के समक्ष लोगों को यह आश्वासन व विश्वास दिया गया है कि सामाजिक न्याय समिति की इस रिपोर्ट को लागू किया जाएगा। परन्तु अभी तक उक्त समिति की रिपोर्ट लागू नहीं हो पायी है। इससे अन्य पिछड़ा वर्ग की अधिकांश जातियां आरक्षण के लाभ से वंचित हैं।

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