कौन है यूपी का इकलौता आईपीएस जिसने नहीं दिया संपत्ति का ब्योरा, मंत्री ने विधानसभा में बताया
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अधिकारियों की संपत्ति के ब्योरे को लेकर सरकार की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। समाजवादी पार्टी के सदस्यों द्वारा नौकरशाही पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने स्थिति स्पष्ट की।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नप्रहर के दौरान उस समय तीखी बहस छिड़ गई, जब विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की संपत्तियों के ब्योरे को लेकर सरकार को घेरा। इस चर्चा के दौरान प्रदेश के इकलौते ऐसे आईपीएस अधिकारी का नाम भी सामने आया, जिसने अब तक अपनी अचल संपत्ति का विवरण शासन को उपलब्ध नहीं कराया है।
कौन है वह आईपीएस अधिकारी?
सदन में जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश कैडर के लगभग सभी आईपीएस अधिकारियों ने समय सीमा के भीतर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा सरकार को सौंप दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वर्ष 2019 से निलंबित चल रहे आईपीएस अधिकारी जसवीर सिंह ही ऐसे इकलौते अफसर हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। उनके अलावा प्रदेश के सभी आईएएस (IAS) अधिकारियों ने भी अपना ब्योरा शासन के पोर्टल पर दर्ज करा दिया है।
सभी अधिकारियों को 'भ्रष्ट' कहने पर भड़के विधानसभा अध्यक्ष
चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारी अपनी संपत्तियों का खुलासा करने से बचते हैं क्योंकि वे भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। उन्होंने पूरी नौकरशाही को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
विधायक के इस तीखे बयान पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के सभी अधिकारियों को सामूहिक रूप से 'भ्रष्ट' कहना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने विपक्षी सदस्य को टोकते हुए कहा, "यदि आपके पास किसी विशिष्ट अधिकारी के विरुद्ध जानकारी या तथ्य हैं, तो केवल उसी के बारे में बोलें। पूरी व्यवस्था पर इस तरह का लांछन लगाना सदन की गरिमा के खिलाफ है।"
संपत्ति का ब्योरा न देने पर कार्रवाई
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में यह भी याद दिलाया कि सरकार इस मामले में सख्त है। उन्होंने कहा कि मीडिया और अन्य माध्यमों से यह जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है कि जिन अधिकारियों ने अपनी संपत्तियों का विवरण समय पर नहीं दिया, शासन ने उनके वेतन रोकने तक की कार्रवाई की है। मंत्री सुरेश खन्ना ने भी आश्वस्त किया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।




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