On Yogi's initiative, the lock of Varanasi was opened after 42 years, now shabad and Hanuman Chalisa together योगी की पहल पर वाराणसी में 42 साल बाद खुला ताला, गुरद्वारा और मंदिर का विवाद खत्म, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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योगी की पहल पर वाराणसी में 42 साल बाद खुला ताला, गुरद्वारा और मंदिर का विवाद खत्म

वाराणसी में गुरुद्वारा और हनुमान मंदिर का विवाद 42 साल बाद मुख्यमंत्री योगी की पहल के बाद खत्म हो गया है। चार दशक से यहां लगा ताला खोल दिया गया है। अब एक तरफ सबद तो दूसरी तरफ हनुमान चालीसा सुनाई देगा।

Tue, 22 July 2025 06:04 PMYogesh Yadav वाराणसी, कार्यालय संवाददाता
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योगी की पहल पर वाराणसी में 42 साल बाद खुला ताला, गुरद्वारा और मंदिर का विवाद खत्म

काशी ने अपनी तासीर के अनुरूप एक और मिसाल पेश की है। करीब 42 साल पुराना मंदिर और गुरुद्वारे का विवाद दोनों पक्षों की सहमति से हल हो गया। जगतगंज स्थित गुरुद्वारे और मंदिर के इस विवाद के हल होने के बाद अब गुरुवाणी और हनुमान चालीसा के स्वर एक-दूसरे से घुले-मिले सुनाई देंगे। एक ही प्रांगण में ‘सत् श्री अकाल’ और ‘महावीर हनुमान की जय’ की गूंज साथ होगी। स्वामित्व विवाद का यह मामला पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचा था। उन्होंने इस दिशा में पहल की थी। इसके बाद अब सबकुछ हल हो गया है।

पूरे मामले में स्वतंत्रता सेनानी शहीद बाबू जगत सिंह के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता का गुरुतर भार संभाला। कई चक्र की वार्ता के बाद इस बात की सहमति बन गई कि एक ही प्रांगण में एक ओर भव्य गुरुद्वारा होगा तो दूसरी ओर रामभक्त हनुमान की दिव्य आभा। इसके बाद करीब 42 वर्षों से बंद ताला खोल दिया गया।

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इस निर्णय की जानकारी भी खुले मन से उल्लास के साथ दोनों पक्षों ने संयुक्त प्रेसवार्ता में सोमवार को दी। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और बड़े हनुमान मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने सिद्धगिरि बाग स्थित गुरुनानक भवन में बताया कि स्वामित्व के विवाद के बाद प्रशासन ने इस पर ताला लगा दिया था। इसके बाद कई चक्र वार्ताओं का दौर चला। तीन हजार से 3500 वर्गफीट भूमि का मामला कोर्ट तक पहुंचा। अंतत: विवाद का समाधान आपसी सहमति से हो गया।

विश्व में मिसाल कायम करेगा

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार करन सिंह सभरवाल ने कहा कि गुरुद्वारा करीब दो सौ साल पुराना है। 42 साल पहले अराजकतत्व इस पर कब्जा करना चाहते थे। इसके बाद ही विवाद ने तूल पकड़ लिया था। बड़े हनुमान मंदिर प्रबंध समिति, जगतगंज के व्यवस्थापक श्याम नारायण पांडेय ने कहा कि आपसी सहमति के बाद विवाद खत्म हो गया है। आपसी सौहार्द ही बनारस की पहचान है।

दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने वाले प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला पूरे विश्व में मिसाल कायम करेगा। इसे शांति और अमन के प्रतीक के रूप में देखा जाएगा। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के वाइस प्रेसिडेंट सरदार परमजीत सिंह अहलुवालिया ने कहा कि यह सहमति एक महान कार्य है। इसे काशी की जनता हमेशा याद करेगी।

गुरु तेग बाहदुर का हुआ था चरण स्पर्श

सरदार परमजीत सिंह अहलुवालिया ने कहा कि सिख पंथ के नौवें गुरु तेग बहादुर करीब दो सौ साल पहले बनारस आए थे। तब वह नीचीबाग (वर्तमान में गुरुद्वारा) में रुके थे। वह अनुयायियों से मिलने जगतगंज भी आते थे। ये उनकी चरण स्पर्श भूमि है। कालांतर में यहां गुरुद्वारा बना।

स्वतंत्रता सेनानी जगत सिंह ने दी थी जमीन

जगत सिंह शोध समिति के संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह ने बताया कि सिखों के गुरु के आगमन के मद्देनजर उनके लिए यह स्थान अत्यंत पवित्र रहा। इसके मद्देनजर ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले महानायक शहीद बाबू जगत सिंह ने सिख समाज को भव्य गुरुद्वारा बनाने के लिए जमीन दी थी।

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