महाशिवरात्रि से एक दिन पहले महादेव के इन दो मंदिरों में पहुंचे योगी, प्रसिद्ध है इस स्थान की कहानी
शनिवार शाम सीएम योगी आदित्यनाथ पहले महादेव झारखंडी स्थिति शिव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान शिव को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बेलपत्र, पुष्प, विविध प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित की। दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक कर विधि विधान से पूजन अनुष्ठान संपन्न किया। इसके बाद वह मुक्तेश्वरनाथ शिव मंदिर आए।

महाशिवरात्रि 2026 (Mahashivratri 2026) की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को महादेव झारखंडी और मुक्तेश्वरनाथ स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना की। विधि विधान से पूजा करने के साथ उन्होंने भगवान भोले शंकर का दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक कर चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की। इन दोनों मंदिरों और इनसे जुड़े स्थान की कहानी काफी प्रसिद्ध है।
शनिवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले महादेव झारखंडी स्थिति शिव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान शिव को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बेलपत्र, पुष्प, विविध प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित की। दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक कर विधि विधान से पूजन अनुष्ठान संपन्न किया। इसके बाद वह मुक्तेश्वरनाथ शिव मंदिर आए। यहां भी उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन करने के साथ दूध और जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया। मुख्यमंत्री ने देवाधिदेव से लोक मंगल और सभी नागरिकों के जीवन में खुशहाली की प्रार्थना की।
हर-हर महादेव के नारों से गूंजे शिवालय
महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर ही यूपी के शिवालय ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज रहे हैं। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ मंदिरों पर जुट रही है। लोग भोर से ही लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान शिव की अराधना के लिए अपनी बारी का इंतजार करेंगे।
गोरखपुर के महादेव झारखंडी मंदिर की प्रसिद्ध है ये कहानी
गोरखपुर के महादेव झारखंडी मंदिर के बारे में कहानी प्रसिद्ध है कि यहां सैकड़ों साल पहले एक घना जंगल हुआ करता था। जंगल में लकड़हारे आते थे। एक बार यहां एक लकड़हारा पेड़ काट रहा था। इसी दौरान कुल्हाड़ी के किसी पत्थर से टकराने की आवाज आई और खून की धारा बहने लगी। एक लकड़हारे ने देखा तो वहां शिवलिंग था। कहा जाता है कि लकड़हारा जितनी बार उस शिवलिंग को ऊपर लाने की कोशिश करता वो उतना ही नीचे धंसता जाता था। लकड़हारे ने भागकर कई अन्य लोगों से यह घटना बताई। इसी दौरान इस क्षेत्र के एक जमींदार को रात में सपना आया कि जंगल में भोलेनाथ प्रकट हुए हैं। इसके बाद जमींदार स्थानीय लोगों के साथ यहां पहुंचे। सभी मिलकर शिवलिंग को जमीन से ऊपर लाने की कोशिश करने लगे। जब आसपास के लोगों को यह बात पता चली तो यहां दूध का अभिषेक किया जाने लगा। दुग्धाभिषेक और पूजा-पाठ का सिलसिला चल पड़ा जो आ भी जारी है।
मुक्तेश्वरनाथ शिव मंदिर से जुड़ी है ये कहानी
गोरखपुर का मुक्तेश्वरनाथ मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर की कहानी सैकड़ों साल पुरानी है। महाशिवरात्रि पर यहां शिव भक्तों का जन सैलाब उमड़ता है। मान्यता है कि करीब 400 साल पहले यहां घना जंगल हुआ करता था। एक बार बांसी के राजा यहां शिकार करते आए थे। जगल में शेरों ने उन्हें घेर लिया। प्राण पर संकट देख राजा ने अपने इष्टदेव भगवान शिव को याद किया। चमत्कार हुआ और शेर लौट गए। इस घटना के राजा ने इस स्थान पर भगवान का मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। उनके आदेश पर यहां मंदिर की स्थापना कराई गई।




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