बिजली अफसरों ने मुझे बदमान करने की सुपारी ले ली है, अपने विभाग पर बरसे उर्जा मंत्री एके शर्मा
यूपी की योगी सरकार में उर्जा मंत्री एके शर्मा बुधवार को अपने ही विभाग के अधिकारियों पर खूब बरसे। कहा कि ऐसा लगता है बिजली विभाग ने हमें बदनाम करने की सुपारी ले ली है। आप लोग आंख-कान बंद किए बैठे हैं और जनता परेशान हो रही।

बिजली कटौती और जन सुविधाओं की स्थिति पर बिफरे ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बुधवार को अधिकारियों को खूब फटकारा। शक्ति भवन में हुई समीक्षा बैठक में पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन से लेकर अधिशासी अभियंता स्तर तक के अधिकारी शामिल थे। एके शर्मा ने कहा कि आप लोग आंख-कान बंद किए बैठे हैं और बिजली आपूर्ति न होने से जनता परेशान है। चेयरमैन से बोले-हम लोग दुकान नहीं चला रहे हैं कि सिर्फ बिल वसूली से मतलब हो। यह सेवा भी है।
ऊर्जा मंत्री ने कुछ देर तक अधिकारियों की सुनने के बाद कहा कि मैं यहां केवल आपकी बात सुनने नहीं आया हूं। बिजली आपूर्ति की जमीनी हकीकत एकदम अलग है। जनता के सामने जाइए तब आपको मालूम पड़ेगा। मैं कई जिलों का दौरा कर मंगलवार को ही वापस आया हूं। मैंने वहां की स्थितियां देखी हैं। मंत्री ने कहा कि यह कोई दुकान नहीं है कि खाली बिल वसूली पर ही ध्यान रहे। यह जनसेवा है। हमें उसी हिसाब से बर्ताव करना होगा। मंत्री ने सभी अधिकारियों को फील्ड पर जाने के आदेश दिए हैं।
पुलिस से भी खराब काम है आप लोगों का
एके शर्मा ने पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन से लेकर सभी अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। मंत्री ने कहा कि जनता पर क्या बीत रही है और वे विभाग के बारे में क्या सोच रहे हैं, आपको मालूम ही नहीं। पुलिस से भी खराब काम है आप लोगों का। जो झूठी रिपोर्ट नीचे से आती है, वही आप लोग ऊपर तक बताते हो। पूरे फीडर या गांव की लाइन काटने के मामलों पर वह बोले कि उन उपभोक्ताओं की क्या गलती है, जो समय से बिल देते हैं? उनका जला हुआ ट्रांसफार्मर न बदलना या उसका उच्चीकरण न करना कौन सा न्याय है? मंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि बिजली विभाग ने हमें बदनाम करने की सुपारी ले ली है। मंत्री ने उपभोक्ताओं की समस्याओं का समय से निपटारा करने के आदेश दिए हैं।
गलत बिल पर भी मंत्री गुस्सा
गलत बिजली बिल जारी होने पर भी मंत्री ने अधिकारियों के पेच कसे। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर के जमाने में एक सामान्य आदमी का 72 करोड़ रुपये बिजली का बिल आ जाता है। यही नहीं, इसे ठीक करने के नाम पर विभाग में पैसे लिए जाते हैं। विजिलेंस के छापे भी गलत जगह डाले जाते हैं। जहां बड़ी चोरी होती है, वहां टीम जाती ही नहीं है। एफआईआर के नाम पर पैसा वसूली हो रही है।
सब बातें लिखी जाएं, मौखिक नहीं
मंत्री ने कहा कि समीक्षा बैठक में उनकी सारी बातें हर्फ दर हर्फ लिखी जाएं। मैं मौखिक तौर पर कह-कहकर थक गया हूं। मीटिंग में मेरी बात सुनने के बाद कहीं और से संचालित होकर आप लोग उल्टा करते हैं। अब यह सब नहीं चलेगा। मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूं। विधान सभा में जवाब देता हूं। आपको किसी ने भी मनमानी करने का अधिकार नहीं दिया है। आपके गलत और असामयिक फैसलों का खामियाजा पूरा प्रदेश भुगत रहा है। जैसे- संविदा कर्मचारियों को निकालना, फोन न उठाना और बिजली दुर्घटनाएं आदि।




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