बिजली कर्मचारियों का मंत्री के घर धावा, ढाई घंटे बाद हाथ जोड़कर पुलिस घेरे में निकले एके शर्मा
बिजली कर्मचारियों ने मंगलवार को यूपी के उर्जा मंत्री एके शर्मा के घर पर धावा बोल दिया। यहां पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस दौरान मंत्री घर में ही कैद रहे। करीब ढाई घंटे बाद हाथ जोड़कर पुलिस के घेरे में बाहर निकले। पुलिस ने उनके लिए रस्सा लगाकर रास्ता बनाया। इस दौरान जबरदस्त नारेबाजी भी होती रही।

पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का विरोध करने वाले बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं का उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाकर बिजली कर्मचारियों ने राजधानी लखनऊ में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के सरकारी आवास पर मंगलवार को धावा बोल दिया। कर्मचारी तकरीबन चार घंटे तक मंत्री के आवास के बाहर डटे रहे। बड़ी तादाद में कर्मचारियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही पुलिस बल भी पहुंच गया। इस दौरान मंत्री एके शर्मा घर में ही फंसे रहे। करीब ढाई घंटे बाद कैबिनेट की बैठक में जाने के लिए मंत्री हाथ जोड़कर पुलिस के घेरे में बाहर निकले। पुलिस को उनके लिए रास्ता भी रस्सा लगाकर बनाना पड़ा।
निजीकरण और कर्मचारियों का उत्पीड़न किए जाने के विरोध में मंगलवार को बिजली कर्मचारी ऊर्जा मंत्री के आवास के बाहर जुट गए। वे मंत्री से मुलाकात करके इन मसलों पर बातचीत की मांग करने लगे। जब ऊर्जा मंत्री ने मिलने से इनकार कर दिया तो कर्मचारियों ने उत्पीड़न बंद करो और निजीकरण वापस लो के नारे लगाने शुरू कर दिए। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर आ पहुंचा लेकिन कर्मचारी तब भी जुटे रहे और विरोध प्रदर्शन करते रहे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मचारियों का सवाल था कि ऊर्जा मंत्री ने 3 दिसम्बर 2022 और 19 मार्च 2023 को संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ जो लिखित समझौता किया था, उससे मुकर क्यों गए? उस समझौते में मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गई सभी कार्रवाइयां वापस ली जानी थीं। वे कार्रवाइयां तो वापस नहीं हुईं और अब फिर से उत्पीड़न किया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन में शैलेंद्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, जूनियर इंजीनियर्स संगठन के अध्यक्ष अजय कुमार, संघर्ष समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी महेंद्र राय, पीके दीक्षित, सुहेल आबिद, श्रीचंद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी, आशीष त्रिपाठी, राम सहारे वर्मा, केएस रावत, आरसी पाल, सुमित श्रीवास्तव व जूनियर इंजीनियर्स संगठन लेसा ट्रांस के अध्यक्ष चंद्रशेखर व सचिव संतोष कुमार विश्वकर्मा आदि शामिल थे।
समझौते का पालन करें मंत्री
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मचारियों की मांग है कि मंत्री ने जो समझौता किया था उसका पालन करें। बर्खास्त किए गए संविदा कर्मचारियों को बहाल किया जाए। उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तबादले निरस्त किए जाएं। बिजली कर्मचारियों के शीर्ष पदाधिकारियों पर दमन के लिए बैठाई गई विजिलेंस की जांच बंद की जाए और मुकदमे वापस लिए जाएं। फेशियल अटेंडेंस के नाम पर रोका गया वेतन जारी किया जाए। निजीकरण निरस्त किया जाए और बिजली कर्मचारियों के घरों पर मीटर लगाने की कार्रवाई भी रोकी जाए।




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