यूपी की इस इनामी महिला बीएसए पर कसता जा रहा शिकंजा, पुलिस ने इस जिले में डाला डेरा
Teacher Suicide Case: यूपी के देवरिया में सहायक अध्यापक की आत्महत्या मामले में आरोपी बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और क्लर्क संजीव सिंह पर शिकंजा कसता जा रहा है। उधर, दोनों आरोपी अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई।

UP News: शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।
गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
तो क्या खुद के बचाव को बाबुओं पर मढ़ दिया है आरोप
शिक्षक कृष्णमोहन के खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के प्रधान सहायक के विरूद्ध निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से नई- नई चर्चाएं हो रही हैं। प्रतिदिन कोई न कोई कहानी सामने आ रही है। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि कार्यालय में सिस्टम का खेल बहुत ही गहराई से किया जाता था। प्रधान सहायक के निलंबन के बाद यह भी चर्चा है कि बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने खुद के बचाव के लिए जांच समिति के समक्ष बाबुओं पर आरोप मढ़ दिया है। सूत्रों की मानें तो बीएसए ने अपने बचाव में पटल पर तैनात रहने के दौरान प्रधान सहायक द्वारा फाइल प्रस्तुत न करने की बात कही है। कुशीनगर जिले के कुबेरस्थाना थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह जिले के गौरीबाजार विकास खण्ड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। 20 फरवरी की रात उन्होने फंदा लगाकर जान दे दी थी।
आत्महत्या से पहले जारी किया था वीडियो
आत्महत्या से पूर्व उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइट नोट और वीडियो भी जारी किया था। मामले में केस दर्ज होने के बाद डीएम ने लिपिक संजीव सिंह को निलंबित कर दिया था। वहीं जांच में दोषी मिलीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को 27 फरवरी को निलंबित कर दिया गया था। शासन स्तर की समिति द्वारा जांच में यह भी सामने आया कि लिपिक संजीव सिंह जिस पटल पर कार्यरत था, उस पटल की जिम्मेदारी उससे पहले प्रधान सहासक तनुज श्रीवास्तव के पास थी।ज्मंबीमत
उस दौरान तनुज ने फाइल को निस्तारण के लिए प्रस्तुत नहीं किया, उसने इसमें लापरवाही बरती थी। जिसके कारण तनुज को 7 मार्च की शाम को बेसिक शिक्षा सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने निलंबित कर दिया। तनुज के निलंबित होते ही चर्चाओं को बाजार तेज हो गया है। इसमें एक नई कहानी सामने आने लगी है। सूत्रों की मानें तो बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने इस मामले में खुद के बचाव के लिए कार्यालय के बाबूओं पर आरोप मढ़ दिया है। ऐसे में अगर बीएसए की बातों पर गौर करें तो शिक्षक कृष्ण मोहन की पीड़ा सुनने के बाद उन्होंने मामले को संज्ञान में लेकर उसकी गंभीरता को क्यों नहीं समझ? और इस संबंध में संबंधित बाबू से बातचीत क्यों नहीं की?




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