सहारा शहर की जमीन पर बनेगी नई यूपी विधानसभा? पैमाइश और सर्वे पूरा; LDAने शासन को भेजी रिपोर्ट
यूपी के लखनऊ में सहारा शहर की जमीन पर नई विधानसभा बनने की चर्चाएं को अब और तेज हैं। शासन के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सहारा शहर की जमीन की पैमाइश और सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है। सर्वे रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है।

यूपी की राजधानी लखनऊ गोमती नगर स्थित सहारा शहर की जमीन पर नई विधानसभा बनने की चर्चाओं को अब और बल मिल गया है। शासन के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सहारा शहर की जमीन की पैमाइश और सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है। सर्वे रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है।
करीब एक महीने पहले नगर निगम ने सहारा शहर की लीज निरस्त की थी। तब से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि आखिर इस जमीन पर आगे क्या बनने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार नई विधानसभा भवन के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश में थी, जबकि सहारा शहर की कुल जमीन 245 एकड़ है। लोकेशन और आकार दोनों ही दृष्टि से यह स्थान इस परियोजना के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
शासन के निर्देश पर हुई नपाई
सूत्र बताते हैं कि पिछले महीने शासन ने एलडीए को मौखिक निर्देश दिए थे कि सहारा शहर की जमीन की नपाई की जाए और उसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। एलडीए ने यह काम पूरा कर लिया है और अब रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। माना जा रहा है कि शासन इस रिपोर्ट के आधार पर भूमि उपयोग और भविष्य की परियोजना पर निर्णय लेगा।
खतौनी में पूरी जमीन एलडीए के नाम
एलडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सहारा शहर की कुल 245 एकड़ जमीन में से 130 एकड़ भूमि नगर निगम के पास थी, जिसे एलडीए ने नगर निगम को अन्य योजनाओं के बदले में दी थी। यह हस्तांतरण एक पत्र के आधार पर हुआ था, लेकिन दस्तावेजों में अब भी एलडीए का ही नाम दर्ज है। नगर निगम ने इस जमीन में से 170 एकड़ भूमि सहारा इंडिया को कालोनी बसाने के लिए लीज पर दी थी, जबकि एलडीए ने 75 एकड़ जमीन ग्रीन बेल्ट के विकास के लिए लीज पर दी थी। शर्तों के उल्लंघन के चलते एलडीए ने पिछले साल और नगर निगम ने एक महीने पहले लीज को निरस्त कर दिया था। इसके बाद शासन ने जमीन की नपाई और सर्वे के निर्देश दिए थे।
कोर्ट में विवाद, अफसर साधे चुप्पी
लीज निरस्त होने के बाद एलडीए ने करीब एक साल पहले ही जमीन पर कब्जा ले लिया था। नगर निगम ने भी हाल ही में अपना कब्जा दर्ज कर लिया है। हालांकि, सहारा इंडिया ने इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। लेकिन चूंकि अदालत से कोई राहत नहीं मिली है, इसलिए नपाई और सर्वे की प्रक्रिया पर कोई कानूनी रोक नहीं रही। एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि जमीन की नपाई और सर्वे पूरा कर लिया गया है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है, अब आगे का निर्णय वहीं से लिया जाएगा।
चर्चा गर्म, पर आधिकारिक घोषणा नहीं
फिलहाल शासन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अफसरों और स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि सरकार इस भूमि पर नई विधानसभा या उससे जुड़े प्रशासनिक भवनों के निर्माण की योजना बना रही है। गोमतीनगर के बीचोंबीच स्थित यह जमीन न केवल राजधानी के बीच में है बल्कि प्रमुख मार्गों से जुड़ी होने के कारण सरकारी परियोजनाओं के लिए रणनीतिक दृष्टि से भी आदर्श मानी जा रही है। यदि सरकार वास्तव में इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो यह लखनऊ के शहरी नक्शे में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।




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