काशी विश्वनाथ का क्राउड मैनेजमेंट बना मॉ़डल, सिस्टम समझने खुद आ रहे सीएम मोहन यादव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 मार्च को काशी पहुंच रहे हैं। वह श्री काशी विश्वनाथ धाम के सफल 'क्राउड मैनेजमेंट' मॉडल का अध्ययन करेंगे, जिसे 2028 में उज्जैन के सिंहस्थ महाकुंभ में लागू किया जाएगा।

Varanasi News: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी काशी का 'क्राउड मैनेजमेंट' (भीड़ प्रबंधन) अब राष्ट्रीय स्तर पर एक नजीर बन चुका है। इसी मॉडल को समझने और सीखने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 मार्च को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंच रहे हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले 'सिंहस्थ महाकुंभ' की तैयारियों में जुटी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव चाहते हैं कि काशी विश्वनाथ धाम में जिस सुगमता और सुरक्षा के साथ प्रतिदिन लाखों भक्तों ने दर्शन किए, उसी सफल तकनीक और प्रबंधन को उज्जैन में भी लागू किया जाए।
मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन का आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 मार्च को बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाएंगे और इसके अगले दिन, यानी 31 मार्च को कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में 'मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन' की अध्यक्षता करेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच धार्मिक पर्यटन, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक तालमेल को बढ़ाना है। सम्मेलन में वाराणसी के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मध्य प्रदेश के उच्चाधिकारी भी शामिल होंगे, जो बारीकी से समझेंगे कि कैसे बिना किसी भगदड़ या असुविधा के विशाल जनसमूह को नियंत्रित किया जाता है।
धार्मिक पर्यटन सर्किट और 'सिंहस्थ 2028' पर फोकस
इस उच्च स्तरीय बैठक में 'काशी-उज्जैन-चित्रकूट' धार्मिक पर्यटन सर्किट को विकसित करने पर विस्तृत चर्चा होगी। चूंकि उज्जैन का महाकाल लोक और काशी विश्वनाथ धाम दोनों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट रहे हैं, इसलिए दोनों के बीच एक समान प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव विशेष रूप से प्रवेश-निकास द्वार, कतार प्रबंधन, डिजिटल मॉनिटरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का अध्ययन करेंगे ताकि 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ को निर्विघ्न संपन्न कराया जा सके।
निवेश और ओडीओपी का अनूठा संगम
यह सम्मेलन केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह निवेश, निर्यात और नवाचार का भी केंद्र होगा। कार्यक्रम परिसर में एक भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें उत्तर प्रदेश के ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) और जीआई टैग प्राप्त हस्तशिल्प का प्रदर्शन होगा। बनारस के सिल्क कारीगर भी इस सम्मेलन में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इस सम्मेलन से न केवल प्रशासनिक कौशल का आदान-प्रदान होगा, बल्कि दोनों राज्यों के पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की नई राह भी खुलेगी।




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