MP Chandrashekhar suffers setback from High Court in Saharanpur riots case; petition for relief dismissed सांसद चंद्रशेखर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका, इस मामले में राहत नहीं, याचिका खारिज, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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सांसद चंद्रशेखर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका, इस मामले में राहत नहीं, याचिका खारिज

यूपी की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ समय से डॉ. रोहिणी घावरी के आरोपों में घिरे हुए हैं। इस बीच हाईकोर्ट से उन्हें एक अन्य मामले में झटका लगा है। चंद्रशेखर की मांग नामांजूर करते हुए कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।

Thu, 18 Dec 2025 12:53 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, प्रयागराज, विधि संवाददाता
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सांसद चंद्रशेखर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका, इस मामले में राहत नहीं, याचिका खारिज

यूपी की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ समय से डॉक्टर रोहिणी घावरी के आरोपों से घिरे हुए हैं। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट से सांसद चंद्रशेखर को झटका लगा है। चंद्रशेखर के विरुद्ध सहारनपुर दंगों से संबंधित एफआईआर और उनके आधार पर लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक ही दिन की विभिन्न घटनाओं के लिए अलग अलग एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं। सहारनपुर के कोतवाली देहात थानाक्षेत्र में नौ मई 2017 को हिंसा और आगजनी के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं पर पथराव, आगजनी व सरकारी अधिकारियों पर हमले का आरोप लगाया था।

इसके बाद उसी दिन अन्य एफआईआर भी दर्ज की गईं, जिनमें निजी संपत्ति के नुकसान, भवन में आगजनी और पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोप थे। चंद्रशेखर ने याचिका में चारों एफआईआर और उनके मुकदमों की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की। कहा गया कि एक ही घटना के लिए कई एफआईआर दर्ज करना गलत है। सभी घटनाएं एक ही दिन, एक ही भीड़ ने अंजाम दी। ऐसे में चार एफआईआर रद्द की जाएं या उनके आरोपपत्रों को पहली एफआईआर के पूरक आरोप पत्र के तौर पर माना जाए।

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अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सभी घटनाएं एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं। ये सभी अलग-अलग स्थानों पर हुई थीं और सभी के गवाह अलग हैं।

कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि घटनाएं एक ही दिन की हैं लेकिन उनके स्थान, समय व पीड़ित अलग-अलग हैं। जांच में किसी बड़ी साजिश का खुलासा होता है तो अलग-अलग एफआईआर दर्ज करना न्यायसंगत है। सभी में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं और ट्रायल गवाही के स्तर पर हैं और कई गवाहों के बयान भी हो चुके हैं। ऐसे में इस स्तर पर मुकदमों में हस्तक्षेप करना और कानूनी कार्यवाही को रद्द करना उचित नहीं है।

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