Maharaja Suheldev was neglected Salar Masood Dargah will be surveyed says Yogi minister Anil Rajbhar महाराजा सुहेलदेव की उपेक्षा हुई; सालार मसूद दरगाह का सर्वे होगा, बोले- योगी के मंत्री अनिल राजभर, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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महाराजा सुहेलदेव की उपेक्षा हुई; सालार मसूद दरगाह का सर्वे होगा, बोले- योगी के मंत्री अनिल राजभर

बहराइच में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह के एएसआई सर्वे की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों की जांच जरूरी है। इस मुद्दे पर वह मुख्यमंत्री से बात करेंगे और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखेंगे।

Mon, 8 June 2026 10:22 AMsandeep हिन्दुस्तान, संवाददाता, बहराइच
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महाराजा सुहेलदेव की उपेक्षा हुई; सालार मसूद दरगाह का सर्वे होगा, बोले- योगी के मंत्री अनिल राजभर

योगी सरकार के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने रविवार को कहा कि बहराइच स्थित सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा सर्वे कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव राष्ट्र नायक हैं। ऐसे में हर वर्ग के लिए वह पूजनीय हैं। रविवार को चित्तौरा झील के पास महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल पर 'हर घर भगवा अभियान' में शामिल होने आए मंत्री से जब दरगाह में सूर्यकुंड के अस्तित्व पर सवाल किया गया तो राजभर ने कहा कि सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री से इस विषय पर बात करेंगे और प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखेंगे।

सालार मसूद दरगाह का ASI सर्वे हुआ है

उन्होंने जोर देकर कहा कि दरगाह का एएसआई सर्वे अवश्य होगा। मंत्री ने पूर्व की सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महाराजा सुहेलदेव की उपेक्षा की गई। कहा कि सपा की सरकारों ने गाजी की मजार को सजाने का काम किया था। मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि इतिहास को सही तरीके से सामने लाने के लिए वैज्ञानिक सर्वे जरूरी है। दरगाह परिसर की पुरातात्विक जांच से कई तथ्य स्पष्ट होंगे।

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विवादों में सालार मसूद गाजी की दरगाह

आपको बता दें सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाला गाजी मियां के उर्स मेले में बड़ी संख्या में मुस्लिमों के साथ हिंदू श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। बहराइच के अलावा संभल, मुरादाबाद और अन्य क्षेत्रों में भी इससे जुड़े मेले लगते हैं। हाल के वर्षों में कुछ हिंदू संगठनों ने मेले का विरोध करते हुए सवाल उठाया है कि यदि सालार मसूद एक आक्रमणकारी था तो उसके नाम पर मेले और आयोजनों का महिमामंडन क्यों किया जाए। दूसरी ओर, अखिलेश यादव का कहना है कि यह भारत की साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है, जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ आते हैं। वहीं योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि किसी भी आक्रांता का महिमामंडन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कौन था सालार मसूद गाजी?

इतिहास और लोककथाओं के अनुसार सैयद सालार मसूद गाजी को महमूद गजनवी का भांजा माना जाता है। उसके जीवन और अभियानों को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। कुछ परंपराओं में उसे योद्धा और सूफी संत के रूप में देखा जाता है, जबकि अन्य उसे विदेशी आक्रमणकारी मानते हैं। सोमनाथ मंदिर से जुड़े आरोपों पर भी इतिहासकारों के बीच एकमत राय नहीं है। लोकमान्य कथाओं के अनुसार 11वीं सदी में महाराजा सुहेलदेव ने चित्तौरा क्षेत्र में हुए युद्ध में सालार मसूद को पराजित किया था। माना जाता है कि उसकी मृत्यु के बाद बहराइच में उसकी मजार बनाई गई, जो बाद में एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गई।

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सुहेलदेव बनाम गाजी की ऐतिहासिक बहस

चित्तौरा झील को उस युद्ध का स्थल माना जाता है जहां सुहेलदेव और सालार मसूद की सेनाएं आमने-सामने हुई थीं। इसी स्थान पर आज महाराजा सुहेलदेव की स्मृति में कार्यक्रम और विजयोत्सव आयोजित किए जाते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2016 में बहराइच में महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा का अनावरण किया था। इसके अलावा सुहेलदेव एक्सप्रेस की शुरुआत और सुहेलदेव के सम्मान में डाक टिकट जारी किए जाने जैसे कदमों ने उन्हें एक ऐतिहासिक नायक के रूप में प्रमुखता दिलाई।

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