शंकराचार्य विवाद में कूदे प्रवीण तोगड़िया; योगी और अविमुक्तेश्वरानंद से बोले- हिन्दू बंटेंगे तो कटेंगे
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में प्रवीण तोगड़िया भी कूद पड़े हैं। तोगड़िया ने कहा कि हिंदू बंटेगा तो कटेगा। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद और महंत योगी आदित्यनाथ से प्रार्थना करता हूं कि वे आपस मिलकर विवाद सुलझा लें।

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि हिंदू बंटेगा तो कटेगा। मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज माघ मेले में जो कुछ कुछ हुआ, वह ठीक नहीं था। दोनों संतों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और महंत योगी आदित्यनाथ को मैं सुझाव नहीं दे सकता। प्रार्थना करता हूं कि वे आपस मिलकर विवाद सुलझा लें।
डॉ. प्रवीण तोगड़िया बुधवार को भदोही शहर में थे। स्वागत समारोह में तोगड़िया ने मीडिया से कहा कि आशा जाहिर करता हूं कि दोनों संत मिलकर हिंदू एकता और सम्मान का रास्ता स्वयं ढूंढ़ेगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद, राष्ट्रीय बजरंग दल को और मजबूत बनाने पर बल दिया। कहा कि इसी तरह से हिंदू आपस में लड़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब एक बार फिर भारत पर मुगलों का शासन हो जाएगा। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या, मंदिरों को तहस-नहस करने पर चिंता जाहिर किया।
आपको बता दें कि मौनी अमावस्या पर रविवार सुबह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनुयायियों के साथ संगम नोज पर पहुंचे थे। शंकराचार्य पालकी पर सवार थे और अनुयायी पैदल चल रहे थे। संगम तट पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। वहां शंकराचार्य को यह कहकर रोका गया कि वह पालकी पर बैठकर स्नान के लिए नहीं जा सकते, उनसे पैदल स्नान के लिए जाने का आग्रह किया जा रहा था। यहां से संगम घाट की दूरी महज 50 मीटर रही होगी। अनुयायियों ने इसका विरोध किया और धक्का-मुक्की करते हुए संगम वाच टावर तक पहुंच गए।
विवाद गहराने पर प्रशासन ने रखा था पक्ष
इसके बाद यह विवाद गहरा गया। स्वयं के अपमान और अपने शिष्यों के साथ पुलिस की अभद्रता से आहत वह मेला प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गए। मौनी अमावस्या महापर्व के महास्नान पर रविवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के डुबकी न लगाने के प्रकरण में सोमवार दोपहर को स्वामी ने मीडिया से बात की तो पुलिस-प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने भी अपना पक्ष रखा।प्रशासन ने पक्ष रख्ते हुए कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि अनुरोध किया गया। आपत्ति तो सिर्फ पहिया लगी पालकी पर थी, जिस पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे। उस समय संगम नोज पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ थी और पहिया लगी पालकी पर सवार होकर वह घाट तक जाते तो भगदड़ अथवा कोई भी अनहोनी की घटना होने की आशंका थी।




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