Politics based on caste and religion; High Court said Election Commission cannot ban it जाति-धर्म के आधार पर राजनीति; हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग नहीं लगा सकता दलों पर रोक, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

जाति-धर्म के आधार पर राजनीति; हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग नहीं लगा सकता दलों पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में यह स्पष्ट कर दिया कि जाति-धर्म के आधार पर राजनीति करने वाले दलों पर रोक का प्रावधान नहीं है। इस आधार पर चुनाव आयोग को किसी दल का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं है। कहा कि यह विषय विधायिका का है।

Wed, 4 Feb 2026 02:05 PMYogesh Yadav लखनऊ, विधि संवाददाता
share
जाति-धर्म के आधार पर राजनीति; हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग नहीं लगा सकता दलों पर रोक

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजनीतिक दलों की ओर से जातीय रैली के विरुद्ध दाखिल एक जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान कानून के तहत किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को केवल इस आधार पर चुनाव लड़ने से पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता कि वह जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह विषय विधायिका का है। वह इस संबंध में कानून बनाए। चुनाव आयोग भी किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकरण इस आधार पर समाप्त नहीं कर सकता।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। न्यायालय ने याचिका पर विस्तृत निर्णय पारित करते हुए कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8-ए ही एकमात्र प्रावधान है। इसके तहत चुनावी कदाचार के मामलों में अयोग्य ठहराया जा सकता है, वह भी तब जब संबंधित व्यक्ति को दोषसिद्ध करार दिया जा चुका हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति पर पूर्ण-प्रतिबंध लगाने का अधिकार वर्तमान में कानून में उपलब्ध नहीं है और यह विषय पूर्णतः विधायिका के क्षेत्राधिकार में आता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:वाराणसी में आधी रात तड़तड़ाईं गोलियां, एक लाख का इनामी कुख्यात बनारसी यादव ढेर

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला भी दिया। कहा कि चुनाव आयोग को भी किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण समाप्त करने का अधिकार प्राप्त नहीं है, सिवाय उन सीमित परिस्थितियों के जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गई हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की मान्यता को चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 16-ए के तहत निलंबित या वापस लिया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में भी नए या अतिरिक्त प्रावधान जोड़ने का अधिकार सिर्फ विधायिका को है, न कि न्यायालय को।

न्यायालय ने अपने निर्णय में एक व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि जाति और धर्म आधारित संकीर्ण सोच का स्थायी समाधान सिर्फ कानूनों के माध्यम से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार और शिक्षा प्रणाली में सही मूल्यों का संचार आवश्यक है, ताकि भावी नागरिक संविधान की भावना, विशेषकर अनुच्छेद 51-ए(ई) में निहित भ्रातृत्व और सामाजिक समरसता के आदर्शों को आत्मसात कर सकें। हाईकोर्ट ने कहा कि यद्यपि कानूनों का निर्माण और उनका प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण है, लेकिन सब कुछ कानून से नियंत्रित नहीं किया जा सकता बल्कि इसके लिए प्रत्येक स्तर पर व्यक्ति, समाज, कार्यपालिका और विधायिका का सामूहिक प्रयास आवश्यक है।

‘जातीय रैलियों पर प्रदेश में है प्रतिबंध’

न्यायालय ने पाया कि 21 सितंबर 2025 को एक शासनादेश जारी करते हुए राज्य सरकार ने प्रदेश में जातीय रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। उक्त शासनादेश में कहा गया है कि राजनीतिक उद्देश्यों से आयोजित जातीय रैलियां समाज में जातीय संघर्ष को बढ़ावा देती हैं जो लोक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के विपरीत है। लिहाजा इन पर उत्तर प्रदेश राज्य में पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। न्यायालय ने कहा कि यदि उक्त शासनादेश का अनुपालन नहीं हो रहा तो याची पर्याप्त आंकड़े एकत्रित कर जनहित याचिका दाखिल कर सकता है।

लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।