पता भरने में ही फंस जा रहे स्वगणना करने वाले
Lucknow News - स्वगणना के दूसरे दिन लोगों को पता भरने में दिक्कत आ रही है। सही लोकेशन पाने में घंटों लग रहे हैं और सर्वर धीमे चलने से जानकारी अपलोड करने में भी परेशानी हो रही है। 8501 लोगों ने स्वगणना पूरी की, लेकिन कई तकनीकी समस्याओं के कारण समय अधिक लग रहा है। गणमान्य लोगों ने भी स्वगणना की प्रक्रिया पूरी की।

स्वगणना के दूसरे दिन लोगों को सबसे बड़ी दिक्कत पता भरने में आ रही है। क्योकि पता भरते ही लोकेशन का विकल्प आ रहा है। लोकेशन की सही जानकारी मिलने में घंटो लग रहा है। इसके साथ ही कई लोगों को सर्वर के धीमे चलने के कारण परेशानी हो रही है। जानकारी अपलोड करने में घंटों समय बर्बाद हो रहा है। स्वगणना में शुरुआत में ही नाम और मोबाइल नंबर भरना है। इसके बाद ओटीपी आएगा। ओटीपी आने में ही कई बार लम्बा समय लग रहा है। इसके बाद पता भरना है। पता भरते ही पहले ब्लाक फिर सेक्टर के विकल्प पर पहुंचते ही स्वगणना करने वालों का दिमाग चकराने लग रहा है। किसी तरह सेक्टर का मिलने पर गूगल मैप की लोकेशन का विकल्प आता है। कम्प्यूटर या मोबाइल पर सही लोकेशन खोजना किसी अभियान से कम नहीं है। इन विकल्पों को भरने के बाद ही आगे की अन्य जानकारियों को भरने का विकल्प मिल पा रहा है।
आठ हजार से ज्यादा ने की स्वगणना
कई इलाकों में पोर्टल धीमा चलने शिकायतें सामने आईं। इसके बावजूद राजधानी में शुक्रवार को शाम पांच बजे तक मिली जानकारी के अनुसार 8501 लोगों ने सफलता पूर्वक स्वगणना का कार्य पूरा किया। 1198 लोग फार्म अपलोड करने से वंचित रह गए। लोगों में उत्साह तो है लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण समय ज्यादा लग रहा है। हजरतगंज निवासी अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि सुबह से तीन बार कोशिश की, लेकिन ओटीपी नहीं आया। बाद में साइबर कैफे जाकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। वहीं, आलमबाग के व्यापारी रतपाल सिंह ने बताया कि व्यवस्था नई है, इसलिए थोड़ी परेशानी स्वाभाविक है।
गणमान्य ने की स्वगणना
जनगणना निदेशालय की टीम ने शुक्रवार को गणमान्य लोगों की स्वगणना की प्रक्रिया पूरी कराई। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधान परिषद अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्रदेव सिंह, अरविंद कुमार शर्मा, ओम प्रकाश राजभर, राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, नरेन्द्र कुमार कश्यप, महापौर सुषमा खर्कवाल, एपीसी दीपक कुमार, प्रमुख सचिव स्टाम्प अमित गुप्ता, प्रमुख सचिव नगर विकास पी गुरु प्रसाद, प्रमुख सचिव पंचायतीराज अनिल कुमार, प्रमुख सचिव ग्राम विकास सौरभ बाबू का स्वगणना का फार्म अपलोड हो गया।
1961 की जनगणना में सदस्य व खेती के साधन की जानकारी प्रमुख थी
नगराम के समेसी मजरा शुकलवा गांव निवासी 87 वर्ष राधेलाल यादव ने बताया कि वर्ष 1961 में हुई जनगणना में अधिकारी पूछते थे कि कितने लोगों का परिवार है। विवाहित व अविवाहित सदस्य कितने हैं। यदि लड़के व बहू अलग रहते थे तो मकान के किस हिस्से में रहते हैं। क्या वे फूस की झोपड़ी में रहते हैं, ऐसे सवाल पूछे जाते थे। सिंचाई का साधन व खेती करने के साधन की जानकारी उसमें विशेष होती थी।
निगोहा में सत्य नारायण इंटर कालेज के रिटायर्ड बाबू विजय शुक्ला ने बताया कि 1961 में हुई जनगणना में वो कक्षा 8 के छात्र थे। उस समय जनगणना वाले सादा पन्ना लेकर आते थे और कच्चा -क्का मकान सहित रहने वाले सदस्यों की संख्या केवल पूछकर चले जाते थे। हरिहरपुर पटसा के रहने वाले 76 वर्षीय कृपा शंकर बताते है कि उस समय की जनगणना में आज जैसी जानकारियां नहीं पूछते थे। केवल घर देखकर अपने मन से लिख लेते थे। कितने लोग घर में रहते है, यह जानकारी जरूर लेते थे। मोहनलालगंज के मऊ में रहने वाले 82 साल के गंगा प्रसाद तिवारी ने बताया कि उस समय जनगणना शिक्षकों ने की थी। शिक्षक गांव में प्रधान के दरवाजे बैठ जाते थे और वहीं पर कुछ लोगों को बुलाकर लिख लेते थे। प्रधान या पंच जो बताते थे वही लिख लेते थे।
जनसंख्या के सर्वाधिक घनत्व वाले शहरों में लखनऊ
2011 जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमी यूपी के गाज़ियाबाद, मेरठ, लखनऊ, कानपुर सर्वाधिक घनत्व वाले जनपदों में हैं। सबसे अधिक घनत्व वाला जिला गाजियाबाद है, जहां प्रति किमी में 3971 व्यक्ति हैं। बनारस प्रदेश का दूसरा अत्यधिक घनत्व वाला जनपद है। यहां 2395 व्यक्ति प्रति किमी घनत्व है।
जिला जनसंख्या जनसंख्या घनत्व (प्रति किमी)
वाराणसी 36,76,841 2395
गाज़ियाबाद 46,81,645 3971
लखनऊ 45,89,838 1816
कानपुर नगर 45,81,268 1452
गोरखपुर 44,40,895 1337
मेरठ 34,43,689 1346
मुरादाबाद 47,72,006 1283
कुशीनगर 35,64,544 1227
आजमगढ़ 46,13,913 1138
प्रयागराज 59,54,391 1086
बरेली 44,48,359 1080
बलिया 32,39,774 1087
गाज़ीपुर 36,20,268 1072
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