यूपी की इस यूनिवर्सिटी में अब कॉट्रैक्ट टीचर भी करा सकेंगे पीएचडी, बदले नियम; जानें डिटेल
लखनऊ यूनिवर्सिटी विद्या परिषद की बैठक में संशोधित पीएचडी अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी गई। अब वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया का आयोजन किया जाएगा। प्रथम चरण मई और द्वितीय चरण दिसंबर में होगा। मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। मूल्यांकन के लिए अब केवल सॉफ्ट कॉपी ही पर्याप्त होगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय में आगामी शैक्षिक सत्र 2026-27 से विवि परिसर के अलग-अलग संकायों में संविदा पर कार्यरत ऐसे शिक्षकों को भी पीएचडी कराने का अधिकार प्राप्त होगा, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया नियमित पदों के समान है। इससे विवि के इंजीनियरिंग, फार्मेसी, पर्यटन, आईएमएस, ज्योतिष विभाग समेत कई अन्य विभागों में कार्यरत 200 से ज्यादा संविदा शिक्षक रिसर्च करा सकेंगे। 300 से ज्यादा सीटें बढ़ जाएंगी। यह निर्णय विवि परिसर में कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी की अध्यक्षता में आयोजित विद्या परिषद की बैठक में लिया गया।
विद्या परिषद की बैठक में संशोधित पीएचडी अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी गई। जिसके तहत अब वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया का आयोजन किया जाएगा। प्रथम चरण मई और द्वितीय चरण दिसंबर में होगा। मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। पहले थीसिस की हार्ड कॉपी जमा करना अनिवार्य था, लेकिन अब मूल्यांकन के लिए केवल सॉफ्ट कॉपी (पीडीएफ) ही पर्याप्त होगी, जिससे समय की बचत होगी। वहीं फास्ट लर्नर श्रेणी के तहत मेधावी छात्र अपनी थीसिस निर्धारित समय से छह महीने पहले भी जमा कर सकते हैं जो 2023 के नियमों में संभव नहीं था।
इसी तरह साक्षात्कार के अंकों के लिए एक विस्तृत अकादमिक इंडेक्स (हाई स्कूल से परास्नातक तक) लागू किया गया है ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता आधारित रहे। प्रवक्ता प्रोफेसर मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि अब शिक्षक रिटायरमेंट की उम्र तक पीएचडी करा सकेंगे। इसके बाद सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे। बैठक में अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. अरविंद मोहन, विज्ञान संकाय प्रो. शीला मिश्रा, अभिनव गुप्त संकाय प्रो. भुवनेश्वरी, वाणिज्य संकाय प्रो. अर्चना सिंह आदि रहे।
एआई नियंत्रण की नीति
प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव का कहना है कि शोध अध्यादेश-2023 के अध्यादेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर स्पष्ट नियम नहीं थे, लेकिन 2026 के नियमों में 10 फीसदी एआई सहायता की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है।
पेशेवरों के लिए पार्ट-टाइम पीएचडी का खुला विकल्प
कामकाजी पेशेवरों के लिए पार्ट-टाइम पीएचडी का विकल्प खुला है, लेकिन इसके लिए कुछ अनिवार्य शर्तें जोड़ी गई हैं। आवेदक के पास मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान, सरकार, सशस्त्र बल, सार्वजनिक उपक्रम या बीएसई या एनएसई में सूचीबद्ध निगमों में वरिष्ठ स्तर पर कम से कम पांच वर्ष का निरंतर अनुभव होना चाहिए। शोधार्थी को पूरी शोध अवधि के दौरान न्यूनतम 120 दिन का इंटरैक्शन सुनिश्चित करना होगा। चयन के लिए 1000 शब्दों के शोध प्रस्ताव को 70 प्रतिशत और कार्य अनुभव व साक्षात्कार को 30 फीसदी वेटेज दिया जाएगा।
शिक्षकों के लिए शोध के विशेष नियम
सुपरन्यूमरी सीटों पर प्रवेश: एलयू और संबद्ध या सहायता प्राप्त कॉलेजों के स्थायी शिक्षक को पूर्णकालिक पीएचडी कार्यक्रम में सुपरन्यूमरी सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
सीटों का निर्धारण: प्रवेश विभाग की कुल सीटों के अधिकतम 10 प्रतिशत तक सीमित होगा, जिसमें प्रत्येक विभाग में कम से कम एक सीट का प्रावधान अनिवार्य है।
वेतन की निरंतरता: एलयू या संबद्ध कॉलेजों के स्थायी शिक्षक जो पीएचडी कर रहे हैं, उन्हें उनके मूल संस्थानों से वेतन प्राप्त करने की अनुमति होगी।
कोर्स वर्क में लचीलापन: कोर्स वर्क में विशेष छूट दी गई है। नियमित कक्षाओं में उपस्थित होकर या ऑनलाइन मोड का विकल्प चुन सकते हैं। 12 क्रेडिट के शोध संबंधी पाठ्यक्रम मूक्स के माध्यम से पूर्ण कर सकते हैं।
उपस्थिति में छूट: कोर्स वर्क पूर्ण करने के बाद शेष शोध अवधि के लिए उपस्थिति मूल संस्थान या विवि के संबंधित विभाग दोनों में से कहीं भी स्वीकार की जाएगी।




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