रक्तदान शिविर में आए सभी लोगों में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से खलबली, पूरे इलाके की जांच की तैयारी
लखनऊ के रहीमाबाद स्थित मुंशीखेड़ा में आयोजित एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रक्तदान करने वाले सभी 19 लोग हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis-B) से संक्रमित पाए गए। बलरामपुर अस्पताल द्वारा लगाए गए इस शिविर के नमूनों की जांच पहले अस्पताल की लैब और फिर लोहिया संस्थान में की गई।

लखनऊ में रहीमाबाद के मुंशीखेड़ा में एक शिविर के दौरान रक्तदान करने वाले सभी लोग हेपेटाइटिस बी संक्रमित मिले हैं। एक साथ इतने लोगों में संक्रमण मिलने पर डॉक्टरों ने खतरे की आशंका जताते हुए पूरे इलाके के लोगों की जांच का सुझाव दिया है। शिविर बलरामपुर अस्पताल की ओर से 24 फरवरी को मुंशीखेड़ा में संत निरंकारी समागम के धार्मिक आयोजन में लगा था। इसमें 19 लोगों की अस्पताल की लैब में जांच के बाद तीन में हेपेटाइटिस बी की पुष्टि हुई। इसके बाद लोहिया संस्थान में भी जांच कराई गई, जहां सभी सैंपल हेपेटाइटिस बी संक्रमित पाए गए। फौरन बलरामपुर अस्पताल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को सूचित करते हुए संक्रमण प्रभावित गांवों में जांच शिविर लगाने का अनुरोध किया है।
रहीमाबाद के चार गांवों तरौना, मुंशीखेड़ा, ससपन और जालामऊ गांव के लोगों ने रक्तदान किया। इस दौरान संक्रमण समेत पांच बीमारियों का पता लगाने के लिए सभी 19 यूनिटों की जांच हुई। तीन यूनिट में हेपेटाइटिस-बी की पुष्टि हुई तो ब्लड बैंक के डॉक्टरों ने दोबारा एलाइजा जांच की मगर इसमें भी सभी सैंपल संक्रमित मिले। स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने बताया कि शिविर में 19 यूनिट खून एकत्र किया गया था। हेपेटाइटिस बी की पुष्टि हुई है। रक्तदाताओं की दोबारा जांच कराई जाएगी। परिजनों की भी जांच होगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की दिशा तय होगी। घबराने की कोई बात नहीं है।
लंबे समय तक अनजान रहते हैं लोग
हेपेटाइटिस-बी एक ऐसी वायरल बीमारी है, जिसके लक्षण शुरुआती दौर में अक्सर नजर नहीं आते हैं। यही कारण है कि कई लोग लंबे समय तक इस संक्रमण से अनजान रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस सबसे पहले मरीज के लिवर पर हमला करता है। समय के साथ गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण शरीर में धीरे-धीरे असर दिखाता है। शुरुआती अवस्था में मरीज को सामान्य तौर पर कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन अंदर ही अंदर वायरस लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है। लंबे समय तक इलाज और जांच नहीं होने पर यह बीमारी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकती है। केजीएमयू गेस्ट्रो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रुंगटा ने बताया कि कुछ मामलों में यह संक्रमण आगे चलकर लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है।
किसी में कोई लक्षण नहीं, दोबारा जांच होगी
रहीमाबाद के मुंशीखेड़ा में संत निरंकारी समागम के धार्मिक आयोजन में लगे शिविर में रक्तदान करने वाले सभी 19 लोग हेपेटाइटिस बी से बेखबर हैं। किसी भी रक्तदाता में कोई भी लक्षण नहीं हैं। सभी पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य लोगों की तरह भोजन और दूसरे कामकाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी इस बात से हैरान है कि इतनी संख्या में एक साथ कैसे संक्रमित हो सकते हैं। वजह जानने के लिए अब इनके दोबारा सैंपल लिए जाएंगे।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार का कहना है कि संक्रमण की वजह पता लगाया जाना जरूरी है। विशेषज्ञ टीम संक्रमितों और परिवार के अन्य सदस्यों के खून की जांच करेगी। इसके बाद कुछ स्थिति साफ हो सकती है। यदि दोबारा जांच में संक्रमित मिले तो अन्य कारणों पर भी गौर किया जाएगा।
रक्तदाताओं में नहीं दिखे लक्षण: शनिवार को हिन्दुस्तान टीम ने मुंशीखेड़ा, तरौना समेत अन्य गांवों का दौरा किया। यहां की स्थिति, बीमारी फैलने की वजह, पानी की व्यवस्था तथा दूसरे कारणों से जुड़ी जानकारी जुटाई। इन गांवों के किसी भी व्यक्ति ने किसी खास तरह की बीमारी से इनकार किया। सभी ने कहा कि सर्दी जुकाम को छोड़ किसी को कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। तरौना गांव में पहले लोग हैंडपंप से पानी लेते थे। अब हर नल योजना के तहत पानी की आपूर्ति हो रही है।
डॉक्टरों ने क्षेत्र में जाहिर की खतरे की आशंका
सभी स्वैच्छिक रक्तदाताओं के खून में हेपेटाइटिस-बी वायरस की पुष्टि से अस्पताल में हलचल मच गई। आनन-फानन अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या की तरफ से स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा। गंभीर खतरे की आशंका जाहिर की। जिसमें उन्होंने रहीमाबाद की स्थिति से अवगत कराया गया। साथ ही ग्रामीणों की जांच कराने व दूसरे जरूरी कदम उठाने की बात कही है ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।




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