केजीएमयू फर्जी डॉक्टर; कई संस्थानों के चिकित्सक और मेडिकल छात्र-छात्राएं रडार पर
लखनऊ के केजीएमयू में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद की जांच अब अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तक पहुंच गई है। पुलिस ने आरोपी का पासपोर्ट जब्त कर उसकी विदेश यात्राओं और बाहरी देशों में फैले नेटवर्क का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है।

केजीएमयू में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद का पासपोर्ट जब्त कर पुलिस और एजेंसियां उसकी विदेश यात्राओं और वहां के कनेक्शन का ब्योरा जुटा रही हैं। हस्साम की पैठ किन-किन देशों में थी? वह मेडिकल छात्र-छात्राओं को अमेरिका और किन देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की तैयारी कर रहा था? वहां उसका कैसा नेटवर्क है? इन तमाम बिंदुओं पर टीमें तफ्तीश कर रही हैं। पुलिस और एजेंसियां शहर और अन्य जनपदों के जो डॉक्टर अथवा मेडिकल छात्र-छात्राएं गिरोह से जुड़े थे, उनका नेटवर्क खंगाल रही हैं। उन सभी को नोटिस जारी कर चौक पुलिस पहले बयान दर्ज करेगी। साक्ष्य मिलने पर मुकदमें में नाम बढ़ाकर गिरफ्तारी भी करेगी।
हस्साम की कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट के आधार पर चिकित्सकों, परिचितों का भी पुलिस पता लगा रही है। इन सभी को पुलिस सूचीबद्ध कर रही है। पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि हस्साम ने अपने शैक्षिक व कुछ अन्य दस्तावेज फर्जी बनवा रखे थे। वह कौन दस्तावेज हैं? दस्तावेजों को बनवाने में उसकी मदद कौन करता था? इन सब बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों से संबंधित कुछ साक्ष्य पुलिस को उसके मोबाइल और इलेक्ट्रानिक गैजेट्स में मिले हैं। चौक पुलिस फर्जी डॉक्टर हस्साम के घर पहुंची। वहां उसके परिवारीजनों से मिले।
शिविर में शामिल छात्र-छात्राओं की होगी पहचान
जांच के तहत कॉर्डियो सेवा फाउंडेशन से जुड़े शिविरों में शामिल छात्र-छात्राओं की पहचान तेज कर दी गई है। सभी हॉस्टल वार्डन, क्लास टीचर्स और संबंधित अधिकारियों को शिविर की तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों के आधार पर प्रतिभागियों की पहचान की जा रही है। साथ ही चिन्हित छात्र-छात्राओं से नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में पूछताछ की तैयारी है।
हिंदू छात्राओं को नेटवर्क से जोड़ना चाहता था
केजीएमयू प्रशासन की छानबीन में सामने आया कि संदिग्ध छात्र फारूक मसूदी का सोशल मीडिया पर बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। जिसमें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोअर्स जुड़े थे। यह भी दावा किया जा रहा है कि वह अपने नेटवर्क के जरिए छात्रों को जोड़ता था। उन्हें कॉन्फ्रेंस व विदेश अवसरों के सपने दिखाता था। वह 2023 से हिन्दू छात्राओं को नेटवर्क से जोड़ने का अभियान चला रखा था। इ
हर हफ्ते मुस्लिम बस्तियों में लगाता था कैम्प
पुलिस और एजेंसियों की जांच में पता चला है कि हस्साम मुस्लिम बस्तियों में हर हफ्ते स्वास्थ्य कैम्प लगाता था। लोगों का विश्वास जीतने के लिए वह प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों से जुड़े डॉक्टरों को आमंत्रित करता था। उन्हें चीफ गेस्ट (मुख्य अतिथि) बनाता था। कार्यक्रम में उनका संबोधन कराता था। मरीजों को तरह-तरह के इलाज के बारे में जानकारी दिलाता था। मरीजों को सस्ते इलाज का झांसा देकर उनसे ठगी करता था। मेडिकल संस्थानों में उन्हें भर्ती कराकर धन की उगाही करता था।




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