लेखपाल OBC आरक्षण: सीएम योगी की सख्ती के बाद एक्शन में राजस्व परिषद, ऐसे होगा संशोधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था का अक्षरशः पालन अनिवार्य है। लंबवत और क्षैतिज दोनों तरह के आरक्षण का सम्मान न केवल कानूनी दायित्व है बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना भी है।

यूपी में लेखपाल के पदों पर ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग का आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती पर राजस्व परिषद एक्शन में आ गया है। 7994 पदों की भर्ती को लेकर राजस्व परिषद ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को एक सप्ताह में संशोधित प्रस्ताव भेजने का पत्र भेजा है। आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने इस संबंध में आयोग को भेजे पत्र में स्थिति साफ की है। राजस्व लेखपाल भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व परिषद को कड़ी चेतावनी दी थी। साफ निर्देश दिए हैं कि आरक्षण प्रावधानों में किसी भी प्रकार की त्रुटि, लापरवाही या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी के बाद राजस्व परिषद ने पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि राजस्व लेखपाल पद का संवर्ग मंडल स्तरीय है। इस पद के नियुक्ति प्राधिकारी उप जिलाधिकारी होते हैं। मंडल स्तरीय संवर्ग होने के कारण मंडलायुक्तों द्वारा जिलों से प्राप्त लेखपाल पद पर श्रेणीवार कार्यरत व रिक्त कार्मिकों के विवरण के आधार पर स्वीकृत पदों में कार्यरत के आधार पर रोस्टरवार रिक्तियों (लम्बवत/क्षैतिज आरक्षण सहित) की श्रेणीवार गणना करते हुए परिषद को प्रस्ताव उपलब्ध कराया है। परिषद ने इसके आधार पर आयोग को प्रस्ताव भेजा है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल सेवा (चतुर्थ संशोधन) नियमावली-2022 के अनुसार भर्ती प्रक्रिया आयोग की परिधि में आने से पहले जिला स्तर पर की जाती थी। परिषद द्वारा आयोग को भेजे गए प्रस्ताव जिला स्तर से मंडलायुक्तों को भेजे गए लेखपाल पद पर श्रेणीवार कार्यरत व रिक्तियों के विवरण पर आधारित है। जिला स्तर पर लेखपाल पद पर कार्यस्त व रिक्त कार्मिकों की श्रेणीवार गणना के संबंध में कुछ जानकारियां मिली हैं। इससे आयोग द्वारा प्रकाशित विज्ञापन में श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन होने की संभावना है। इसलिए उक्त भर्ती प्रस्ताव में पदों की संशोधित सूचना एक सप्ताह में आयोग को भेजी जाएगी।
आरक्षण का अक्षरशः पालन अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था का अक्षरशः पालन अनिवार्य है। लंबवत और क्षैतिज दोनों तरह के आरक्षण का सम्मान न केवल कानूनी दायित्व है बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना भी है। उन्होंने सभी विभागों को दो टूक संदेश देते हुए चेतावनी दी है कि आरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और ऐसी त्रुटियाँ शासन के स्तर पर कदापि स्वीकार नहीं होंगी।
बता दें कि राजस्व लेखपाल के 7,994 पदों के लिए 16 दिसंबर 2025 को जारी विज्ञापन के बाद यह तथ्य सामने आया कि जनपदों से भेजे गए श्रेणीवार आंकड़ों में स्पष्ट विसंगतियाँ थीं। मुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद अब राजस्व परिषद श्रेणीवार कार्यरत एवं रिक्त पदों की गणना को पुनः सत्यापित कर रहा है, ताकि संशोधित अधियाचन पूरी तरह त्रुटिरहित स्वरूप में आयोग को भेजा जा सके।
राजस्व परिषद की सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद परिषद ने प्राथमिकता से सभी आंकड़ों की समीक्षा प्रारंभ कर दी है। उन्होंने कहा कि संशोधित अधियाचन आयोग को भेजे जाने के उपरांत लेखपाल भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, विवाद-मुक्त और आरक्षण प्रावधानों के पूर्ण अनुपालन के साथ आगे बढ़ेगी।
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी, विसंगतियों पर कड़ी कार्रवाई अनिवार्य है, और युवाओं के भविष्य से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून सम्मत आचरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेखपाल भर्ती में हुआ यह हस्तक्षेप न केवल वर्तमान प्रक्रिया को सुधारने वाला कदम है, बल्कि आने वाली सभी भर्तियों के लिए भी सख्त संदेश है कि आरक्षण संबंधी नियमों के पालन में जरा भी ढिलाई नहीं चलेगी।




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