High Court upset with subordinate letter in affidavit seeks response from Kushinagar SP हलफनामे में अधीनस्थ लिखने पर भड़का हाईकोर्ट, कुशीनगर एसपी से मांगा जवाब, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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हलफनामे में अधीनस्थ लिखने पर भड़का हाईकोर्ट, कुशीनगर एसपी से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कुशीनगर एसपी के हलफनामे की भाषा पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे विरोधाभासी और अपमानजनक मानते हुए एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा है।

Sun, 5 April 2026 05:49 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, हाईकोर्ट
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हलफनामे में अधीनस्थ लिखने पर भड़का हाईकोर्ट, कुशीनगर एसपी से मांगा जवाब

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के हलफनामे की भाषा पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे विरोधाभासी और अपमानजनक मानते हुए एसपी से एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब संतोषजनक न होने पर एसपी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति हरबीर सिंह ने गोलू पांडेय की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामला कुशीनगर के सलीम अंसारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है। इस मामले में एसपी कुशीनगर केशव कुमार ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया है। कोर्ट ने इस हलफनामे का अवलोकन किया तो उसमें कई गंभीर विरोधाभास और आपत्तिजनक बातें सामने आईं। एसपी ने हलफनामे के पैरा छह में कहा कि सलीम अंसारी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। पैराग्राफ आठ में कहा कि मौत के कारण का पता नहीं चल सका। वहीं, पैरा 11 में उन्होंने लिखा कि 22 अक्टूबर 2025 को जब घायल नबी रसूल को मेडिकल स्टोर ले जाया गया तो सलीम वहां पहुंचा था और वह पूरी तरह फिट था। बाद में दीपक उसे अस्पताल ले गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

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इसके अलावा एसपी ने अपने हलफनामे के पैरा 10 में जिला अदालत के लिए विद्वान अधीनस्थ अदालत शब्द का इस्तेमाल किया। हाईकोर्ट ने इस शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक द्वारा हलफनामे में इस्तेमाल की गई भाषा अपमानजनक प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालतों के लिए अधीनस्थ अदालत जैसे शब्दों के इस्तेमाल की कड़े शब्दों में निंदा की है।

कोर्ट ने एसपी कुशीनगर को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि उन्होंने किस कानूनी अधिकार के तहत ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है। यह भी कहा कि एसपी कुशीनगर की ओर से दाखिल हलफनामा प्रथमदृष्टया टालमटोल से भरा और अपने आप में ही विरोधाभासी प्रतीत होता है।

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बहाना बनाकर गैरहाजिर वकील पर लगा हर्जाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए एक कोर्ट में बीमारी का बहाना और दूसरी में हाजिर होने को न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश मानते हुए इसे गंभीरता से लिया है। साथ ही ऐसा करने वाले वकील पर 20 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने वाराणसी के कैंट थाने में दर्ज मुकदमे की एक अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित वकील ने न केवल बीमारी का गलत बहाना बनाया, बल्कि यह भी नहीं बताया कि याचियों को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील का आचरण यह दर्शाता है कि उन्होंने न्यायालय को धोखा देने का प्रयास किया।

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