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कुमारी मायावती कॉलेज जिसे UGC ने दिया ये खास दर्जा, यूपी में पहली बार; जानें खासियत

एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के बाद राजकीय डिग्री कॉलेजों को स्वायत्तता दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। अंतत: गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर में स्थित कुमारी मायावती राजकीय गर्ल्स पीजी कॉलेज से इसकी शुरुआत हो गई है। यह पीजी कॉलेज चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से संबद्ध है।

Sat, 21 Feb 2026 11:23 AMAjay Singh प्रमुख संवाददाता, लखनऊ
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कुमारी मायावती कॉलेज जिसे UGC ने दिया ये खास दर्जा, यूपी में पहली बार; जानें खासियत

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर के कुमारी मायावती राजकीय गर्ल्स पीजी कॉलेज को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऑटोनॉमस (स्वायत्त) कॉलेज का दर्जा दे दिया है। यह यूपी का पहला राजकीय कॉलेज है, जिसे स्वायत्ता दी गई है। अब यह कॉलेज नए-नए पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगा और खुद अपनी परीक्षाएं आयोजित करेगा। यूजीसी की ओर से इसे विभिन्न योजनाओं से ज्यादा फंड भी मिल सकेगा।

उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग गुणवत्तापरक शिक्षा देने पर पूरा जोर दे रहा है। योगी सरकार इसे लगातार बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ऐसे में एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के बाद राजकीय डिग्री कॉलेजों को स्वायत्तता दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। आखिरकार गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर में स्थित कुमारी मायावती राजकीय गर्ल्स पीजी कॉलेज से इसकी शुरुआत हो गई है। यह पीजी कॉलेज चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से संबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देश में वर्ष 2035 तक स्वायत्त और घटक कॉलेज ही रहेंगे। संबद्ध डिग्री कॉलेजों को स्वायत्तता दिलाई जाएगी और वह घटक कॉलेज बनेंगे। विश्वविद्यालयों पर प्रवेश और परीक्षा का बोझ कम करने के लिए स्वायत्तता को कदम बढ़ाने को डिग्री कॉलेजों को प्रेरित किया जा रहा है।

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क्या होता है स्वायत्त और गैर-स्वायत्त कॉलेज का अंतर?

जानकारों के अनुसार स्वायत्तता मिलने से किसी कॉलेज को अपने पाठ्यक्रम और शैक्षणिक गतिविधियों को स्वयं तैयार और नियंत्रित करने का अधिकार मिल जाता है। जबकि एक गैर-स्वायत्त महाविद्यालय किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर काम करता है। गैर स्वायत्त कॉलेज की डिग्री खुद कॉलेज द्वारा नहीं बल्कि मूल विश्वविद्यालय द्वारा दी जाती है। कॉलेज केवल उस विशेष डिग्री को हासिल करने का एक माध्यम है। परीक्षाएं भी विश्वविद्यालय के दिशानिर्देशों के अनुसार ही आयोजित की जाती हैं और उन्हीं के द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। स्वायत्त महाविद्यालय चलाने वाले निदेशक मंडल को पाठ्यक्रम की योजना बनाने और उसे इस तरह से तैयार करने में आसानी होती है जिससे छात्रों को लाभ हो। स्वायत्त कॉलेजों में परीक्षा के प्रश्नपत्र कॉलेज द्वारा तैयार किए जाते हैं। प्रश्नपत्रों पर उनका अधिक अधिकार होता है। जबकि गैर-स्वायत्त कॉलेजों में प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए जाते हैं और विश्वविद्यालय की नीतियों का पालन करते हैं।

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एक स्वायत्त कॉलेज यूनिवर्सिटी के हस्तक्षेप के बिना अपनी प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं के अनुसार काम कर सकता है। एक स्वायत्त कॉलेज का पाठ्यक्रम छात्रों को नए रुझानों से अपडेट में मदद करता है। एडमिशन से लेकर सफल प्लेसमेंट तक, हर कदम पर छात्र की मदद करता है।

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