किताब छापकर दे दीजिए, कम बोलना पड़ेगा; सदन में माता प्रसाद की बातें सुनकर योगी भी हंस पड़े
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बजट भाषण में खूब हंसाया। उन्होंने कहा कि वह तो 30 से 35 मिनट ही बोलते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को ढाई घंटे सुनना पड़ता है। योगी से कहा कि वह किताब छापकर दे दें, जिससे उनको कम बोलना पड़ा। इस पर मुख्यमंत्री भी हसंने लगे।

विधानसभा में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बजट भाषण में खूब हंसाया। उन्होंने कहा कि हम तो 30 से 35 मिनट ही बोलते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को ढाई घंटे सुनना पड़ता है। किताब छापकर दे दीजिए आपको भी कम बोलना पड़ेगा। इस पर मुख्यमंत्री भी हसंने लगे। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने की मांग की। प्रदेश में बेरोजगारी दर को कम करने के लिए रिक्त पदों पर भर्ती का अनुरोध किया। कानून-व्यवस्था ठीक करने के लिए तहसीलों और जिलों में ही निस्तारण की सलाह दी।
माता प्रसाद पांडेय ने निजी कॉलेजों की फीस पर नियंत्रण के लिए कमेटी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा मेडिकल कॉलेज खोलने से काम नहीं चलेगा, वहां इलाज और दवा की व्यवस्था हो। स्थिति यह है कि सिर्फ रेफर किया जा रहा है। संविदा कर्मियों की भर्ती की जगह स्थाई भर्तियों पर ध्यान दिया जाए। स्वास्थ्य सेवाओं में संविदा भर्तियों पर रोक होनी चाहिए। जातीय जनगणना कराने की भी मांग की।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा कि मुझे गंगा मैया ने बुलाया है और गंगा मैया ने देश सेवा का मौका भी दिया, लेकिन नमामि गंगे योजना का क्या हाल है? गंगा आज भी साफ नहीं हुई। आप बजट ठीक कर दें तो गंगा मैया भी खुश हो जाएंगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस सरकार का यह आखिरी आम बजट है। इस बजट पर बहुत सारी बातें हो गईं, अब लौट के आने पर ही बात होगी। उन्होंने हसंते हुए यह भी कहा कि अब चला-चली की बेला है। सजग हो जाओ नहीं इधर यानी विपक्ष में आ जाओगे।
बजट बनाते समय समेकित निधि का नहीं रखा गया ध्यान
उन्होंने कहा कि बजट बनाते समय सरकार ने कंसोलिडेटेड फंड (समेकित निधि) का ध्यान नहीं रखा। समाजवादी सरकार की अपेक्षा इस सरकार में कर्ज बढ़ गया है। इस पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उठकर सफाई दी और कहा कि कर्ज की दर 34 से घटकर 27 फीसदी हो गई है। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऋण ग्रहता की चर्चा होते ही वित्त मंत्री चिढ़ क्यूं जाते हैं। रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देश के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद 30 प्रतिशत से ज्यादा कर्ज नहीं हो सकता है। वित्त मंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि आपने कहा है कि यूपी में प्रति व्यक्ति आय 1.20 लाख का अनुमान है। पूरे देश में 53 प्रतिशत आय की दर के बराबर भी यूपी नहीं पहुंच पाया है। सकल घरेलू उत्पाद में तमिलनाडु, महाराष्ट्र के बाद यूपी तीसरे नंबर पर है। यह स्थिति कर्नाटक के नीचे आने के बाद है।
सरकार कोई एक बड़ा प्रोजेक्ट बता दे
उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार का बजट तीन लाख करोड़ था। इस बजट में पुलिस मुख्यालय, लोकभवन, इकाना स्टेडियम और मेट्रो रेल जैसी परियोजनाएं आईं। आप नौ लाख करोड़ का बजट लेकर आएं हैं, कोई भी एक बड़ा प्रोजेक्ट बता दीजिए। भाजपा सरकार एक्सप्रेसवे के सिवा कोई दूसरा बड़ा काम नहीं गिना सकती है। आपकी सरकार में जितना बजट बनाया जाता है, उतनी वित्तीय स्वीकृतियां जारी नहीं हो पाती हैं। केंद्रीय योजनाओं का पैसा देर से आने पर वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने में देरी हो सकती है, लेकिन राज्य की योजनाओं का पैसा तो समय से जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने पर्सनल लेजर एकाउंट (पीएलए) बनाने की जानकारी देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर पैसा खर्च न होने पाने पर इसमें रखा जाए। सरकार बजट खर्च नहीं कर पाती, केवल आंकड़े की बाजीगिरी करती है।
चिकित्सा-शिक्षा की व्यवस्था हो
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मानव जीवन में चिकित्सा-शिक्षा बहुत जरूरी है। प्रदेश में न बेहतर इलाज की व्यवस्था है और न ही शिक्षा की। मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ाई जा रही है, लेकिन वहां इलाज की सुविधा नहीं है। डॉक्टर और दावा की सुविधा देने से ही फायदा होगा। मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को रेफर किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज पीजीआई भेजते हैं और वहां बेड नहीं है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक तो हैं, लेकिन पढ़ाई नहीं हो रही है, जबकि निजी स्कूलों में कम वेतन पाने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। बुनियादी शिक्षा ठीक होने पर ही उच्च शिक्षा अच्छी होगी। उन्होंने कहा कि बड़े स्कूल में पढ़ने वाला आईएएस और छोटे स्कूल में पढ़ने वाला रिक्शा चालक बनता है।
बेरोजगारी दूर करने के हो इंतजाम
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति काफी खराब है। पूर्वांचल के लोग आज भी पलायन को मजबूर हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में यूपी के लोग काम करने को मजबूर हैं। पूर्वांचल के लोग तो मॉरीशस और त्रिनिदाद जैसे देशों में नौकरी करने चले गए। उन्होंने कहा कि निवेश केवल नोएडा में ही न हो, पूर्वांचल में भी हो, नहीं तो दिल्ली वालों का कब मन बदल जाए और नोएडा को दिल्ली में मिला लें। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि बड़े नहीं छोटे उद्योगों से लोगों के रोजगार का रास्ता खुलता है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था भी ठीक करनी होगी। तहसील और जिला स्तर पर ही मुकदमों का निस्तारण होना चाहिए। इसके लिए रिक्त पदों को भरा जाए। स्थानीय स्तर पर मामलों का निस्तारण होने से कानून व्यवस्था भी ठीक होगी।




साइन इन