Kidney racket in Kanpur regional office runs multi city network कानपुर में किडनी के सौदागर, रीजनल ऑफिस से चलता था कई शहरों का नेटवर्क, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कानपुर में किडनी के सौदागर, रीजनल ऑफिस से चलता था कई शहरों का नेटवर्क

किडनी के सौदागर कानपुर में रीजनल ऑफिस चला रहे थे। इस अवैध धंधे के कारोबार को बढ़ाने के लिए इन लोगों ने कानपुर ही नहीं बल्कि यूपी के प्रयागराज, मेरठ समेत कई जिलों के ऐसे एजेंट तैयरा किए जो मरीजों को झांसा देते थे।

Wed, 15 April 2026 11:12 PMPawan Kumar Sharma हिन्दुस्तान, कानपुर
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कानपुर में किडनी के सौदागर, रीजनल ऑफिस से चलता था कई शहरों का नेटवर्क

UP News: किडनी के सौदागर कानपुर में रीजनल ऑफिस चला रहे थे। इस अवैध धंधे के कारोबार को बढ़ाने के लिए इन लोगों ने कानपुर ही नहीं बल्कि यूपी के प्रयागराज, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा जैसे बड़े शहरों में ऐसे एजेंट तैयार किए जो किडनी मरीज को फंसाते थे। पुलिस को ऐसे ही एक एजेंट की तलाश है जो प्रयागराज में मास्टरमाइंड रोहित का काम संभालता था। विभागीय सूत्र बताते हैं कि किडनी का काला कारोबार वेस्ट यूपी से संचालित हो रहा था जिसके तार दिल्ली और हरियाणा के बड़े सफेदफोशों से जुड़े हैं। फिलहाल पुलिस फरार दो आरोपियों अफजल और अली की तलाश में जुटी है।

रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में बीते 29 मार्च को बिहार के बेगूसराय निवासी एमबीए छात्र आयुष कुमार की किडनी मुफ्फरनगर की पारुल तोमर को लगाई गई। ऑपरेशन के दूसरे दिन पारुल को प्रिया हास्पिटल के आईसीयू जबकि आयुष को मेडलाइफ अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस को इस ऑपरेशन की जानकारी मिली तो कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। इनमें किडनी कांड के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी के साथ आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, पति सुरजीत सिंह आहूजा, एजेंट शिवम अग्रवाल, मेडलाइफ अस्पताल के मालिक राजेश कुमार व राम प्रकाश कुशवाहा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह, गाजियाबाद के एक अस्पताल में ओटी मैनेजर राजेश कुमार व ओटी संचालक कुलदीप सिंह राघव और डॉ. अफजल का ड्राइवर परवेज सैफी शामिल है।

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इस खेल के दो अहम खिलाड़ी डॉ. अफजल और मुद्स्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली की तलाश में पुलिस की कई टीमें प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली व अन्य जगहों पर छापेमारी कर रहीं हैं। दोनों मोबाइल बंद करके फरार हैं। डीसीपी वेस्ट एमएम कासिम आबिदी बताते हैं कि इस रैकेट का मुख्य सरगना फिलहाल रोहित है जो 12वीं पास है। उसने ही कानपुर, प्रयागराज समेत कई जिलों में एजेंट बना रखे थे। रोहित के प्रयागराज के एजेंट नवीन पांडेय की तलाश में दबिश दी जा रही है। रोहित के तार कई और शहरों से जुड़े हो सकते हैं। रोहित की पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर इस पर पूछताछ की जाएगी।

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...तो मेरठ, हरियाण और दिल्ली से जुड़े हैं तार

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस किडनी रैकेट में अभी तक जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनसे में कोई भी डॉक्टर नहीं बल्कि अधिकतर झोलाछाप निकले हैं। जितने भी ऑपरेशन हुए, वह सब अली ने किए। सूत्र बताते हैं कि अली ने इसके लिए दिल्ली के अस्पतालों से इसकी ट्रेनिंग ली। हालांकि किडनी ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरी के मामले में इस थ्योरी पर विश्वास करना मुश्किल है, लेकिन यह सच है तो फिर बड़ा सवाल है कि ओटी मैनेजर को ट्रेनिंग कब, कहां और किसने दी। कहीं यह ट्रेनिंग किडनी के अवैध कारोबार को शुरू करने के उद्देश्य से तो नहीं दी गई। जानकार बताते हैं कि इस रैकेट में कई डॉक्टर भी शामिल हैं। ये डॉक्टर वेस्ट यूपी में मेरठ, हरियाणा में गुड़गांव और देश की राजधानी दिल्ली में बैठकर इस रैकेट को हवा दे रहे हैं। अफसर भी दबी जुबान में कहते हैं कि जांच पारदर्शी हो तो आग दूर तक जाएगी। कई बड़े खुलासे होंगे। तो अब सवाल है कि आखिर कौन इस कांड की सभी परतें नहीं खुलने दे रहा है।

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रोहित और शिवम की क्रॉस चेकिंग से ही सामने आ सकेगा पूरा सच

डीसीपी वेस्ट बताते हैं कि अभी तक की जांच में रोहित ही मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। शिवम अग्रवाल कानपुर में उसका काम संभालता था। पुलिस के पास इसके साक्ष्य भी हैं। लेकिन दोनों से गिरफ्तारी के समय पूछताछ हुई तो उनके जवाबों में भिन्नता थी। इस भिन्नता की हकीकत जानने के लिए दोनों का एक साथ पुलिस कस्टडी रिमांड लिया जाएगा। दोनों से अलग-अलग पूछताछ के बाद आमना सामना कराया जाएगा। जिसके बाद ही पूरा सच सामने आ सकेगा।

अफजल और अली की तलाश में तीन टीमें

किडनी रैकेट की अहम कड़ी अली की तलाश में पुलिस टीम दिल्ली में उसके रिश्तेदारों के यहां छापेमारी कर रही है। जांच में सामने आया कि पहले वह इनके संपर्क में था लेकिन बाद में मोबाइल बंद कर दिया। उधर, अफजल भी मोबाइल बंद करके फरार हो गया है। सूत्रों की माने तो दोनों पुलिस से बचने के लिए नेपाल भाग सकते हैं। ये लोग कानूनी शिकंजे से बचने के लिए वकीलों से भी संपर्क कर रहे हैं।

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