दाहिनी आंख में बीमारी, बाईं की जांच कर लिख दी 18 दवाएं, राजधानी के मशहूर केजीएमयू का हाल
लखनऊ के केजीएमयू में एक आयुष्मान कार्ड धारक मरीज के साथ इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। डॉक्टर ने मरीज की गलत आंख की जांच रिपोर्ट तैयार की और मुफ्त इलाज के बजाय ₹15,000 की बाहर की दवाएं और लेंस लिख दिए। केजीएमयू प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

UP News: केजीएमयू प्रशासन की सख्ती के बावजूद डॉक्टर मरीजों को धड़ाधड़ बाजार की दवा लिख रहे हैं। यहां नेत्र रोग विभाग में आयुष्मान योजना के मरीज को मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले बाहर की दवाएं और लेंस आदि लिख दिया। आरोप है कि मरीज पर निजी मेडिकल स्टोर के नाम की पर्ची से लेंस, दवा आदि खरीदने का दबाव डाला गया। मर्ज दायीं आंख में था। बायीं आंख के ऑपरेशन की जांच की। ऐसे में घबराए मरीज ने दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन कराने का फैसला किया है।
काकोरी स्थित जेहटा निवासी गीता कश्यप (57) के दाहिने आंख में मोतियाबिंद की शिकायत है। पति गणेश चंद्र कश्यप का कहना है कि 17 मार्च को पत्नी को बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग दिखाया था। डॉक्टरों ने केजीएमयू से आंख का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। 20 मार्च को केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में दिखाया। गणेशा का आरोप है कि समस्या दाहिने आंख में थी, लेकिन रिपोर्ट में बाएं आंख में खून के धब्बे दिखा दिए गए। उन्होंने रिपोर्ट बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया। वहां के डॉक्टर को मरीज की बाई आंख ठीक नजर आई। मरीज ने भी दाहिनी आंख में परेशानी होने की बात कही। बलरामपुर के डॉक्टर ने मरीज को केजीएमयू में ही ऑपरेशन कराने की सलाह दी।
रिपोर्ट पर ध्यान न दो, ऑपरेशन सही होगा
गणेश ने बताया कि तीन अप्रैल को वह पत्नी गीता को लेकर केजीएमयू नेत्र रोग विभाग पहुंचे। डॉक्टर ने कहा रिपोर्ट भले ही गलत है, लेकिन ऑपरेशन सही आंख का होगा। डॉक्टर ने स्टाफ को ऑपरेशन की फाइल तैयार करने के निर्देश दिए। गणेश ने कहा कि उनके पास प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना का कार्ड है। लिहाजा योजना के तहत मुफ्त ऑपरेशन करा दीजिए। इस पर कर्मचारी भड़क उठा। उसने कहा कि यहां आयुष्मान का लाभ नहीं मिलता है। ऑपरेशन के लिए लेंस और सामान बाहर से ही लाना पड़ेगा। स्टाफ ने चिन्हित मेडिकल स्टोर के नाम के साथ सामान की पर्ची थमा दी।
करीब 15 हजार का सामान
बता दें केजीएमयू में तीन रोज पहले ही कार्य परिषद की बैठक में बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टर को चार्जशीट थमाने के आदेश हुए हैं। इसके बाद भी संस्थान में बाहर की दवाएं लिखने का सिलसिला जारी है। गणेश डॉक्टर की लिखी करीब 18 दवा की पर्ची लेकर तय मेडिकल स्टोर पहुंचे। जहां संचालक ने लेंस के 6200 रुपये सहित करीब 15 हजार का पूरा सामान होना बताया। साथ ही यह भी कहा कि सामान का भुगतान नगद ही लिया जाएगा। पीड़ित के पास इतने रुपये न होने के कारण वह घर लौट आया।
कॉल कर रात 11 बजे मंगवाई फाइल
पीड़ित का आरोप है कि वह इलाज की फाइल लेकर घर आ गया था। रात करीब 11 बजे उसे बार-बार कॉल करके तत्काल फाइल वापस नेत्र विभाग में जमा करने का दबाव बनाया गया। परेशान होकर वह रात में ही आकर फाइल जमा करके गया।
इस बारे में केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि आंखों की जांच में कैसे गड़बड़ी हुई। इसकी जांच कराई जाएगी। मरीज को बाजार से दवा लिखने के मामले की अलग से जांच होगी। मरीज को इंसाफ मिलेगा।




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