पापा अब डर लगने लगा है, दुबई के बिट्स पिलानी कैंपस में पढ़ रही छात्रा जैनब का छलका दर्द
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने दुबई में पढ़ रही कानपुर की बेटी जैनब राशिद को खौफ में डाल दिया है। बिट्स पिलानी के दुबई कैंपस में बीटेक कर रही जैनब ने फोन पर अपने पिता से कहा, पापा, अब डर लगने लगा है।

अमेरिका-इजराल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का दायरा खाड़ी देशों तक बढ़ता जा रहा है। इससे दुबई में रह रहे लोगों में दहशत की स्थिति बढ़ती जा रही है। दुबई में काफी संख्या में भारत के लोग कामकाज और पढ़ाई के लिए रहते हैं। इन्हीं में से एक कानपुर की जैनब भी है। देश से हजारों किलोमीटर दूर पढ़ रही कानपुर के जाजमऊ की बेटी जैनब राशिद की पढ़ाई को भी खौफ के बीच ला खड़ा किया है। दुबई में गोला-बारूद और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच अब वह डर के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर है। फोन पर वह अपने पिता से यही कहती है- पापा… अब यहां सच में डर लगने लगा है।
अलीगढ़ मुस्लिम ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के ओहदेदार राशिद अलीग, कानपुर के जाजमऊ इलाके में रहते हैं। उनकी पत्नी उजमा राशिद बताती हैं कि दो साल पहले उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला बिट्स पिलानी के दुबई सेंटर में कराया था। वह वहां बायोटेक्नोलॉजी से बीटेक के दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही है। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था और पढ़ाई भी ठीक चल रही थी।
वह दुबई में अपनी खाला के घर रहकर रोज दुबई एकेडमिक इंटरनेशनल सिटी स्थित कैंपस आती-जाती थी। लेकिन जैसे ही ईरान-अमेरिका के बीच जंग तेज हुई, हालात बदलने लगे। दुबई के कई इलाकों में हमलों और धमाकों की खबरों के बाद जैनब भी सहम गई। लगातार सायरन, सुरक्षा अलर्ट और धमाकों की आवाजों के बीच उसका रोज कैंपस जाना मुश्किल हो गया। हालात बिगड़ते देख संस्थान ने भी कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं।
राशिद बताते हैं कि पहले रोज बेटी से आसानी से बात हो जाती थी, लेकिन अब कई बार संपर्क भी मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा कारणों से वहां से फोटो या वीडियो भेजने पर भी पाबंदी लगा दी गई है और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी काफी नियंत्रण है। पिछली बार जब बात हुई तो जैनब की आवाज में डर साफ झलक रहा था। परिवार ने उसे वापस बुलाने की भी सोची, लेकिन मौजूदा हालात में यात्रा आसान नहीं है। हालांकि जैनब ने खुद ही पढ़ाई बीच में छोड़कर लौटने से मना कर दिया है। वह कहती है कि हालात सामान्य होने तक किसी तरह पढ़ाई जारी रखेगी।
राशिद बताते हैं कि सबसे बड़ी चिंता यही है कि पूरा इलाका युद्ध के तनाव में है। हालांकि, वहां यह व्यवस्था है कि संभावित हमले से पहले एडवाइजरी जारी कर दी जाती है और लोगों को बताया जाता है कि किस इलाके से दूर रहना है। इसके बावजूद दूर बैठकर माता-पिता की चिंता कम नहीं हो रही।




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