It is not a crime for a married woman lover to not marry her, Allahabad High Court Lucknow Bench remarks शादीशुदा महिला से प्रेमी का विवाह न करना कोई अपराध नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, जानें पूरा मामला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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शादीशुदा महिला से प्रेमी का विवाह न करना कोई अपराध नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, जानें पूरा मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने टिप्पणी की है कि महिला से उसके प्रेमी की ओर से कथित तौर पर वादा करने के बावजूद विवाह न करना कोई अपराध नहीं है। विशेष तौर पर तब जबकि उस स्त्री का अपने पति के साथ विवाह विच्छेद भी नहीं हुआ है।

Wed, 6 Aug 2025 06:47 AMDeep Pandey लखनऊ, विधि संवाददाता
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शादीशुदा महिला से प्रेमी का विवाह न करना कोई अपराध नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, जानें पूरा मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने एक निर्णय में स्पष्ट किया है कि विवाहित महिला से उसके प्रेमी की ओर से कथित तौर पर वादा करने के बावजूद विवाह न करना कोई अपराध नहीं है। विशेष तौर पर तब जबकि उस स्त्री का अपने पति के साथ विवाह विच्छेद भी नहीं हुआ है। न्यायालय ने इस टिप्पणी के साथ सत्र अदालत के उस आदेश को विधिपूर्ण करार दिया है जिसमें अदालत ने अभियुक्त को दुराचार व भ्रूण हत्या के आरोप से उन्मोचित कर दिया था। यह निर्णय न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने पीड़िता की याचिका पर पारित किया।

न्यायालय ने पाया कि नवंबर 2023 में पीड़िता की ओर से लिखाई गई एफआईआर में कहा गया था कि सात साल पूर्व पीड़िता का अभियुक्त से प्रेम हुआ था। इस दौरान दोनों के बीच बने संबंधों से पीड़िता गर्भवती भी हुई लेकिन अभियुक्त ने गर्भपात करा दिया। पीड़िता का अन्यत्र विवाह हो गया लेकिन अभियुक्त विवाह का झूठा वादा करके उसने पीड़िता के साथ उसकी शादी के बाद भी सम्बंध बनाए। बाद में विवाह से इनकार कर दिया। सत्र अदालत ने अभियुक्त को उन्मोचित करते हुए अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि पीड़िता ने अपनी मर्जी से अभियुक्त के साथ सम्बंध बनाए। इसमें दुराचार जैसी कोई घटना नहीं घटित हुई। अदालत ने भ्रूण हत्या के आरोप पर पाया कि अल्ट्रासाउंड दाखिल किया गया है लेकिन उस पर तिथि नहीं अंकित है। ऐसे में यही माना जाएगा कि पीड़िता अपने पति से गर्भवती हुई थी।

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सत्र अदालत ने प्रश्नगत आदेश में यह भी टिप्पणी की कि पीड़िता ने शादीशुदा होते हुए बिना विवाह विच्छेद कराए, अभियुक्त से सम्बंध बनाए। यदि आईपीसी की धारा 497 असंवैधानिक न घोषित हुई होती तो पीड़िता पर इसके तहत अपराध कारित करने का आरोप होता। वहीं हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि एक विवाहिता से विवाह न कर के अभियुक्त ने कोई अवैधानिकता नहीं कारित की है।

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