भारत कोई मठ नहीं, संवैधानिक गणराज्य, कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने पर भड़के चंद्रशेखर
कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने पर सांसद चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया एक्स पर लंबी-चौड़ी पोस्ट लिख डाली। जिसमें उन्होंने कहा, भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं।

आठ नवंबर को बहराइच में यूपी पुलिस द्वारा कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भड़क गए। सोशल मीडिया एक्स पर लंबी-चौड़ी पोस्ट लिखकर सीएम योगी और यूपी पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने लिखा, भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं। इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी जाती है-यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है। उन्होंने आगे लिखा,
सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है। किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं। यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए चंद्रशेखर ने लिखा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि-आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है। यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है।
सांसद ने कहा, सवाल उठते है-पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है? अपनी पोस्ट में चंद्रशेखर ने सीएम योगी को भी टैग किया और तीन बातें लिखीं।
1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं।
2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है।
3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा।
इसका साफ़ मतलब है-संविधान सर्वोच्च है-कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता।
विवाद बढ़ने पर पुलिस ने जारी किया स्पष्टीकरण
कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में यूपी पुलिस ने सफाई देते हुए कहा है कि पुलिस ट्रेनिंग के दौरान कठिन मानसिक, शारीरिक परिश्रम के कारण 28 पुलिसकर्मियों ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया था, इसलिए ट्रेनिंग की मेहनत से मानसिक अवसाद न हो और पुलिसकर्मियों में मनोबल बना रहे। इसको लेकर बहराइच में आचार्य पुंडरीक गोस्वामी को आमंत्रित किया गया था।




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