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दर्द के सबसे कठिन क्षणों में लिया परिवार ने लिया बड़ा फैसला, ब्रेन डेड महिला ने दो को दिया नया जीवन

रानी देवी को दिमाग में रक्तस्राव हुआ। आनन-फानन में उन्हें PGI लखनऊ लाया गया। यहां 20 मार्च को न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 23 मार्च को जटिल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन व उचित देखभाल के बावजूद उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो सका।

Sun, 29 March 2026 05:43 AMAjay Singh वरिष्ठ संवाददाता, लखनऊ
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दर्द के सबसे कठिन क्षणों में लिया परिवार ने लिया बड़ा फैसला, ब्रेन डेड महिला ने दो को दिया नया जीवन

दर्द के सबसे कठिन क्षणों में लिया गया एक फैसला दो जिंदगियों के लिए उम्मीद की किरण बन गया। पीजीआई में ब्रेन डेड घोषित की गई एक महिला के परिजनों ने साहस दिखाते हुए अंगदान का फैसला लिया। इससे दो किडनी मरीजों को नया जीवन मिल सका।

मध्य प्रदेश स्थित रीवा निवासी रानी देवी को दिमाग में रक्तस्राव हुआ। आनन-फानन में उन्हें पीजीआई लाया गया। यहां 20 मार्च को न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जांच कराई। मरीज की हालत गंभीर थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 23 मार्च को जटिल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन व उचित देखभाल के बावजूद मरीज की तबीयत में सुधार नहीं हो सका।

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स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन-उत्तर प्रदेश (सोटो-यूपी) के संयुक्त निदेशक एवं पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने बताया 27 मार्च को रानी देवी को विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया। इसके बाद ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर और सोटो-यूपी की टीम ने परिवारीजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया। परिवारीजनों ने सहमति देते हुए किडनी दान का फैसला किया। डॉ. राजेश हर्षवर्धन के नेतृत्व में पूरी रात ट्रांसप्लांट टीमों के बीच समन्वय किया गया।

नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद के नेतृत्व में वेटिंग लिस्ट के आधार पर दो मरीजों का चयन किया गया। यूरोलॉजी और ट्रांसप्लांट टीमों ने सफलतापूर्वक किडनी हार्वेस्ट और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की। 28 मार्च की सुबह दोनों मरीजों में किडनी प्रत्यारोपित की गई। इस केस में लीवर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया, क्योंकि समय रहते कोई उपयुक्त मरीज केजीएमयू या अन्य केंद्रों पर नहीं मिल सका। वि यदि लीवर के लिए अधिक इंतजार किया जाता, तो किडनियां भी उपयोग में नहीं आ पातीं। ऐसे में समय पर लिया गया निर्णय दो जिंदगियों को बचाने में निर्णायक साबित हुआ।

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ये है डॉक्टरों की टीम

यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एमएस अंसारी, डॉ. संचित रुस्तगी, डॉ. संजय सुरेखा, डॉ. संदीप साहू, डॉ. दिव्या, डॉ. तपस डॉ. अंकित का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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क्या बोले निदेशक

पीजीआई के निदेशक डॉ.आरके धीमन ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने तत्परता से प्रक्रिया पूरी की। दोनों किडनी जरूरतमंद मरीजों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की। वर्ष 2026 में यह संस्थान का दूसरा कैडेवरिक अंगदान है।

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