यूपी में अभी वोटर बने तो कब तक रहेगा लिस्ट में नाम? SIR का ये फायदा भी जान लें आप
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि 1 जनवरी 2026 को 18 साल की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता बनाने पर विशेष जोर दिया जाए। अभी तक कुल 79 लाख से अधिक लोग मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 भर चुके हैं।

Special Intensive Revision (SIR) 2026 : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया अभी चल रही है। मतदाता बनने के लिए ऐसे में फॉर्म-6 भरने वाले का नाम अगले एसआईआर तक सुरक्षित रहेगा। इससे अगले 20 या 22 साल बाद होने वाले एसआईआर में नाम के मैपिंग का झंझट नहीं फंसेगा। मतदाता तो आप बाद में भी बन सकते हैं, लेकिन फिर यह अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। वहीं यूपी एसआईआर में अब तक 70 प्रतिशत से अधिक नोटिसों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा की ओर से सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि 1 जनवरी 2026 को 18 साल की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता बनाने पर विशेष जोर दिया जाए। अभी तक कुल 79 लाख से अधिक लोग मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 भर चुके हैं। दावे व आपत्तियों की प्रक्रिया के बीच 6 मार्च तक मतदाता बनने के लिए भरे गए फॉर्म-6 के आधार पर नाम 10 अप्रैल को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा।
यह वर्ष 2025-26 की एसआईआर प्रक्रिया की अंतिम मतदाता सूची होगी। ऐसे में इस एसआईआर की प्रक्रिया की मतदाता सूची में नाम शामिल होने पर मैपिंग का झंझट नहीं होगा, क्योंकि एसआईआर की वर्ष 2003 की मतदाता सूची से 1.04 करोड़ लोगों के नाम का मिलान नहीं हो पाने पर उन्हें नोटिस जारी की गई है और उन्हें सुनवाई के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) व एईआरओ के पास दस्तावेज लेकर जाना पड़ रहा है।
यूपी में 70% से अधिक नोटिसों पर सुनवाई पूरी
यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में नोटिस पाने वाले मतदाताओं में 73.32 प्रतिशत की सुनवाई पूरी हो चुकी है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान न होने और तार्किक विसंगति वाले कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी की गई है। इसमें अब तक 2.28 करोड़ मतदाताओं की नोटिस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की ओर से सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सहज व सरल ढंग से सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करें। नोटिस पाने वाले 3.26 करोड़ लोगों में 1.04 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सकी है। ऐसे लोगों की सुनवाई निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी व सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कर रहे हैं। अभी हाल ही में 3768 नए एईआरओ की तैनाती की गई है।
सूची पर आपत्ति और दावा छह मार्च तक
2.26 करोड़ वोटर ऐसे हैं, जिनके नाम, पिता के नाम व माता-पिता की आयु से मात्र 15 वर्ष ही अंतर है। ऐसे में इन तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं की सुनवाई बीएलओ घर-घर जाकर बीएलओ एप के माध्यम से सत्यापन कर मामले का निस्तारण कर रहे हैं। यही कारण है कि अब नोटिसों का निस्तारण तेजी से हो रहा है। 6 मार्च तक मतदाता सूची पर दावा व आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।




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