ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर में कैसे बचाएगा कवच? NER ने यूपी में यहां शुरू कराई ट्रेनिंग
इस सुविधा से ट्रेन हादसों का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा। एक ही ट्रैक पर आगे पीछे दौड़ने वाली ट्रेनों में टक्कर नहीं होगी। ट्रेनों के टकराने की हालत में आने से पहले ही दोनों ट्रेनों में ऑटोमेटिक ब्रेक लगने के साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी ट्रेनों का संचालन भी बंद हो जाएगा।

ट्रेनों के आमने-सामने की टक्कर को रोकने में कारगर ‘कवच’ को लेकर एनई रेलवे ने ट्रेनिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए गाजीपुर को प्रशिक्षण केन्द्र के तौर पर चुना गया है। यहां गार्ड से लेकर लोको पायलट और स्टेशन मास्टर को ट्रेनिंग दी जाएगी। गाजीपुर ट्रेनिंग सेंटर से इसके लिए शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है।
दावा किया जा रहा है कि इस सुविधा से ट्रेन हादसों का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा। एक ही ट्रैक पर आगे पीछे दौड़ने वाली ट्रेनों में टक्कर नहीं होगी। ट्रेनों के टकराने की स्थिति में आने से पहले ही दोनों ट्रेनों में ऑटोमेटिक ब्रेक लगने के साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी ट्रेनों का संचालन भी बंद हो जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्य के होने से संरक्षा और सुदृढ़ होगी।
438 किमी लंबे ट्रैक के लिए कवच की मंजूरी पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) का बाराबंकी से गोरखपुर होकर छपरा रेल रूट जल्द ही कवच (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) से लैस होगा। करीब 438 किमी लंबे इस ट्रैक के लिए कवच की मंजूरी मिलने के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। सबसे पहले सीतापुर-बुढ़वल रेल रूट पर स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित की जाएगी।
रेड सिग्नल पार होते ही अपने आप लग जाएगा ब्रेक
ट्रेन हादसों में कमी लाने के लिए दो साल पहले रेलवे ने आरडीएसओ के साथ मिलकर काम शुरू किया था। परिणामस्वरूप स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) को विकसित की गई। कवच प्रणाली ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की मॉनिटरिंग करती है। लोको पायलट से किसी प्रकार की चूक होने पर कवच पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट करेगा। रेड सिग्नल पार होते ही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाएगा।




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