hindu samaj se koi to alankaar nikla shankaracharya avimukteshwaranand said on resignation of bareilly city magistrate हिंदू समाज से कोई तो ‘अलंकार’ निकला, बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर बोले अविमुक्तेश्वरानंद, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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हिंदू समाज से कोई तो ‘अलंकार’ निकला, बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर बोले अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अलंकार अग्निहोत्री के प्रति हम लोगों के मन में दो तरह की भावना है। एक तो उन्होंने त्यागपत्र दिया, थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा कि उनको पद छोड़ना पड़ गया लेकिन साथ ही उनके लिए अच्छी भावना भी है कि कोई तो निकला, जो हमारे हिंदू धर्म का ‘अलंकार’ निकला।

Mon, 26 Jan 2026 11:00 PMAjay Singh संवाददाता, प्रयागराज
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हिंदू समाज से कोई तो ‘अलंकार’ निकला, बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर बोले अविमुक्तेश्वरानंद

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। अलंकार अग्निहोत्री ने माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बटुक शिष्यों को चोटी पकड़कर पीटे जाने और यूजीसी रेगुलेशन 2026 को अपने इस्तीफे की वजह बताया। उधर, यह खबर जब प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर के बाहर प्रशासन के खिलाफ बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तक पहुंची तो उन्होंने इस पर दुख जताया। शंकराचार्य ने कहा कि उनके (अलंकार अग्निहोत्री) प्रति हम लोगों के मन में दो तरह की भावना है। एक तो उन्होंने त्यागपत्र दिया, थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा कि उनको पद छोड़ना पड़ गया लेकिन साथ ही उनके लिए अच्छी भावना भी है कि कोई तो निकला, जो हमारे हिंदू धर्म का ‘अलंकार’ निकला, जिसने यह दिखा दिया कि हमारे मन में सनातन धर्म और उसके प्रतीकों के प्रति कितना गहरा प्यार है।

शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने कितना परिश्रम किया होगा। उन्होंने पद छोड़ कर अपने आपको ऐसे सरकार से मुक्ति पा ली, जिसने शंकराचार्य का अपमान किया हो, छोटे-छोटे बटुकों का चोटी पकड़ कर खींचा हो, यूजीसी जैसे हिन्दू समाज को बांटने वाला कानून लाया हो। अलंकार ने प्रदेश सरकार के कारनामों से आहत होकर पद छोड़कर सरकार को चेतावनी देते हुए सीटी बजा दी है। अभी तक राजनीतिक पार्टियों की बात कही जा रही थी, अब एक सरकारी अधिकारी का इस्तीफा सरकार के इरादों पर करारा तमाचा है।

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बाबा रामदेव पर भी दी कड़ी प्रतिक्रिया

शंकराचार्य ने बाबा रामदेव को लेकर एक बार फिर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि रामदेव को शंकराचार्य परंपरा का ज्ञान नहीं है। वह आर्य परंपरा के हैं, ऐसे व्यक्ति को क्षमा ही किया जा सकता है। बार-बार पालकी से जाने की बात कहने वाले यह क्यों नहीं समझते कि गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति बग्घी पर ही क्यों चलते हैं, क्या वह बिना बग्घी के नहीं निकल सकते। यह तो एक परंपरा है जो निभाई जा रही है।

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शंकराचार्य ने कहा, चोटियां केवल ब्राह्मण की नहीं खींची गई है, अपितु चोटियां खींचकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र यानी पूरे हिंदू समाज को अपमानित किया गया है। ये हिन्दुओं की विरोधी सरकार है। हम गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, लेकिन गण का हाल यह है कि साधु संत पीटे जा रहे हैं। संविधान की शपथ लेने वाले लोगों की ये हरकत है। आखिर ऐसे गणतंत्र मनाने का क्या औचित्य है।

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