High Court statement Recruitment exam marks are not confidential information can be obtained through RTI भर्ती परीक्षाओं के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी; हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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भर्ती परीक्षाओं के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी; हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय जानकारी नहीं माने जा सकते। इसलिए यदि परीक्षा में शामिल कोई अभ्यर्थी आरटीआई  के तहत दूसरे अभ्यर्थियों के अंक की जानकारी मांगता है, तो इसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक नहीं है।

Tue, 10 March 2026 05:55 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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भर्ती परीक्षाओं के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी; हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय जानकारी नहीं माने जा सकते। इसलिए यदि परीक्षा में शामिल कोई अभ्यर्थी सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई ) के तहत दूसरे अभ्यर्थियों के अंक की जानकारी मांगता है, तो इसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक नहीं है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक निजी गोपनीय जानकारी की श्रेणी में नहीं आते।

मामला रेलवे में विधि सहायक पद के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा था। वर्ष 2008 में एक अभ्यर्थी ने सूचना का अधिकार कानून के तहत अपने और दो अन्य अभ्यर्थियों के अंक तथा उत्तरपुस्तिकाओं की जानकारी मांगी थी। विभाग ने अंक उपलब्ध नहीं कराए, लेकिन याची को किसी भी दिन उत्तरपुस्तिकाओं का अवलोकन करने की अनुमति दी। इस आदेश के खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की गई, जहां आयोग ने याची को उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां देने का निर्देश दिया। इसके बाद वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स के महाप्रबंधक ने उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देने के निर्देश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने कहा कि आरटीआई कानून के तहत ऐसी निजी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता, जो किसी सार्वजनिक गतिविधि या सार्वजनिक हित से संबंधित न हो और जिससे किसी की निजता का अनावश्यक हनन हो।

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हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक सार्वजनिक गतिविधि से जुड़े होते हैं और इन्हें साझा करने से किसी की निजता का उल्लंघन नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में जांच लंबित हो तो उस अवधि तक जानकारी रोकी जा सकती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में अंक बताने से इंकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी दूसरे अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी मांगना अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता, क्योंकि उत्तर पुस्तिकाओं में परीक्षक के हस्ताक्षर या अन्य ऐसी जानकारी हो सकती है जो सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।

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आरटीआई का उद्देश्य जानकारी उपलब्ध कराना

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अभ्यर्थी को उत्तर पुस्तिका का अवलोकन करने की अनुमति देना पर्याप्त माना जा सकता है। हाइकोर्ट ने कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। इसलिए सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंकों की जानकारी देना जरूरी है, लेकिन दूसरे अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देना अनिवार्य नहीं है।

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