High Court Lucknow bench expressed displeasure over non-cooperation of UP government officials and also imposed a fine यूपी सरकार के अधिकारियों के असहयोग की प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, जुर्माना भी लगाया, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी सरकार के अधिकारियों के असहयोग की प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, जुर्माना भी लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार के अधिकारियों के असहयोग की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है, वहीं केंद्र सरकार के अधिवक्ता के उपस्थित न होने व जवाब न दाखिल करने पर, उस पर भी 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।

Wed, 19 Nov 2025 02:49 PMDeep Pandey लखनऊ, विधि संवाददाता
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यूपी सरकार के अधिकारियों के असहयोग की प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, जुर्माना भी लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार के अधिकारियों की लापरवाही व असहयोग पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकारी असहयोग की प्रवृत्ति अपना रहे हैं। इससे कोर्ट का कीमती समय नष्ट होता है और वर्षों से लंबित प्रकरणों में अनावश्यक देरी होती है। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार पर 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है, वहीं केंद्र सरकार के अधिवक्ता के उपस्थित न होने व जवाब न दाखिल करने पर, उस पर भी 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने नैतिक पार्टी की ओर से वर्ष 2014 में दाखिल एक जनहित याचिका पर पारित किया। याचिका में किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम का मुद्दा उठाया गया है। न्यायालय ने कहा कि 2 अगस्त 2024 को पारित आदेश के बाद दायर किए गए अनुपूरक शपथ पत्र में भी उन बिंदुओं को संबोधित नहीं किया गया जिन पर विशेष रूप से निर्देश दिए गए थे। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह कोई पहला मामला नहीं है जिसमें केवल औपचारिकता निभाने के लिए ऐसा अधूरा और निरर्थक हलफनामा दायर कर दिया गया हो।

हाईकोर्ट ये टिप्पणी भी की

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि न केवल विभाग, बल्कि राज्य के अधिवक्ताओं को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा तैयार शपथ पत्र वास्तव में अदालत के प्रश्नों का उत्तर दे रहे हैं या नहीं। न्यायालय ने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी ने किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम तक को नहीं पढ़ा, यदि पढ़ा होता, तो उनके हलफनामे में केवल औपचारिक वाक्यों के बजाय वास्तविक जागरूकता उपायों का उल्लेख होता। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी स्थिति लगभग असहयोग के बराबर है, जो न्यायिक कार्यवाही को बाधित करती है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसम्बर के सप्ताह में होगी।

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एक और मामले में राज्य पर लगा 15 हजार का हर्जाना

वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 11 वर्षों से विचाराधीन एक जनहित याचिका के मामले में विभागीय उदासीनता पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। साथ ही राज्य सरकार पर 15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। न्यायालय ने यह आदेश जयंत सिंह तोमर की याचिका पर दिया है। वहीं आदेश के बावजूद एनएचएआई और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जवाब न देने पर भी नाराजगी जतायी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले भी पूछा था कि कि क्या मैंगो बेल्ट में पेड़ों के जियो-टैगिंग की वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा सकती है। इस बार भी राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने निर्देश लेकर जानकारी देने की बात कही। इस पर न्यायालय ने कहा कि मामला 11 वर्षों से लंबित है और राज्य पक्ष अभी भी निर्देश लेने की बात कर रहा है, जो स्वीकार नहीं है। मामले की अगली सुनवायी 25 नवंबर को होगी।

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