260 रुपये चोरी के आरोपी कर्मचारी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं, जांच और आपराधिक कार्यवाही साथ चलेंगे
260 रुपये चोरी के आरोपी टकसालकर्मी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच और आपराधिक कार्यवाही साथ चलाने की अनुमति दे दी है। कर्मचारी के खिलाफ पिछले साल दिसंबर में आरोप पत्र जारी किया गया था। इसके बाद सस्पेंड कर दिया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत सरकार की टकसाल से 260 रुपये के सिक्के चोरी करने के आरोपी कर्मचारी को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने नोएडा की टकसाल के इस कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच एकसाथ चलाने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार की टकसाल में सिक्कों की ढलाई का काम होता है। इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर है। निष्पक्ष जांच से संस्था में पादर्शिता आएगी और कर्मचारियों में विश्वास उत्पन्न होगा। इसी के साथ कोर्ट ने विभागीय जांच और निलंबन पर रोक लगाने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने आनंद कुमार की याचिका पर दिया है। नोएडा स्थित टकसाल में असिस्टेंट ग्रेड तृतीय के पद पर कार्यरत आनंद कुमार को 19 दिसंबर 2024 को गेट पर सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों ने 20 रुपये के 13 सिक्के चोरी करने के आरोप में पकड़ा था। इसके बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।
इससे पूर्व टकसाल अधिकारियों ने तीन दिसंबर 2024 को आरोप पत्र जारी करते हुए याची के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी थी। साथ ही याची को 19 दिसंबर 2024 को निलंबित कर दिया गया। याची ने विभागीय जांच व निलंबन आदेश को याचिका के माध्यम से चुनौती दी।
कहा गया कि एक ही मामले में दो कार्यवाही (विभागीय जांच व आपराधिक कार्यवाही) एक साथ नहीं चल सकती। दोनों कार्यवाही में सबूत समान हैं। ऐसे में विभागीय जांच जारी रखने से याची के प्रति पूर्वाग्रह उत्पन्न होगा और उसे बचाव में नुकसान होगा।
विपक्षी के अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने दलील दी कि आपराधिक कार्यवाही व विभागीय जांच में सबूत अलग हैं। दोनों कार्यवाही का उद्देश्य अलग है इसलिए दोनों एक साथ चल सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि याची पर भारत सरकार की टकसाल से रुपये चोरी करने का आरोप है। ऐसे में गंभीर मामले के आरोपी को काम करने देना संस्था के हितों के लिए सही नहीं होगा। जांच पर रोक लगाने से जवाबदेही की कमी की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। टकसाल जैसे संवेदनशील संस्थान के हित में जांच लंबित रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए विभागीय जांच आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।




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