Allahabad High Court issues interim stay on deployment of LIC employees for census duty जनगणना ड्यूटी में इन कर्मचारियों की तैनाती पर अंतरिम रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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जनगणना ड्यूटी में इन कर्मचारियों की तैनाती पर अंतरिम रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

यूपी में जनगणना ड्यूटी में इन कर्मचारियों की तैनाती पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपम चतुर्वेदी की खंडपीठ ने नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज फेडरेशन की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

Tue, 9 June 2026 08:55 PMDeep Pandey प्रयागराज, विधि संवाददाता
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जनगणना ड्यूटी में इन कर्मचारियों की तैनाती पर अंतरिम रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना-2027 के कार्यों के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कर्मचारियों को तैनात करने संबंधी कानपुर नगर निगम के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित अधिकारी को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था और आदेश कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपम चतुर्वेदी की खंडपीठ ने नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज फेडरेशन की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अपील में 29 मई 2026 को एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता संगठन ने 5 मई 2026 को कानपुर नगर निगम के जोनल अधिकारी/चार्ज अधिकारी द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत एल आई सी कर्मचारियों को जनगणना-2027 के कार्यों में लगाने का निर्णय लिया गया था। संगठन ने अदालत से इस निर्णय को रद्द करने तथा भविष्य में एल आई सी कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी में न लगाने का निर्देश देने की मांग की थी। एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता ने विवादित आदेश को स्पष्ट रूप से चुनौती नहीं दी थी और केवल सामान्य प्रकृति की प्रार्थना की गई थी।

खंडपीठ ने कहा कि कानपुर नगर निगम के जोनल मैनेजर/जोनल अधिकारी को जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4 के तहत एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए तैनात करने का अधिकार नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि यह आदेश वर्ष 2011 में इसी न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा दिए गए निर्णय के विपरीत है।

अदालत ने जनगणना अधिनियम की धारा 7(सी) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार या उसके अधिकृत अधिकारी किसी संस्थान, फर्म या फैक्ट्री के कर्मचारियों से जनगणना कार्य में सहायता ले सकते हैं, लेकिन यह सहायता केवल उस संस्थान या प्रतिष्ठान के परिसर के भीतर की जनगणना गतिविधियों तक सीमित है। कर्मचारियों को प्रतिष्ठान के बाहर सामान्य जनगणना कार्यों में लगाने की अनुमति इस प्रावधान से नहीं मिलती।

राष्ट्रीय महत्व का तर्क खारिज

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है, इसलिए कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी आदेश की वैधता केवल उसके उद्देश्य से तय नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वह कानून में निर्धारित प्रावधानों का पालन करता है या नहीं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया विवादित आदेश कानून के विपरीत दिखाई देता है।

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खंडपीठ ने कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। अदालत ने पक्षकारों को जवाबी हलफनामे दाखिल करने का समय देते हुए मामले को 6 जुलाई 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। तब तक 5 मई 2026 के विवादित आदेश के संचालन पर रोक रहेगी।

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