यूपी के प्राइमरी स्कूलों को बेहतर बनाने वाले एआरपी-एसआरजी के लिए खुशखबरी, बढ़ा भत्ता; जानें कितना
विद्यार्थियों को परिषदीय स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए ये एआरपी और एसआरजी, शिक्षकों की मदद करते हैं। वे विद्यालयों का भ्रमण कर शिक्षकों को पाठ्य सामग्री और टीएलएम इत्यादि तैयार करने में मदद करते हैं। यही नहीं शैक्षिक वीडियो तैयार कराने, कार्यशाला कराने के लिए भी शैक्षिक भ्रमण करते हैं।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने वाले एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) और स्टेट रिसोर्स पर्सन (एसआरजी) बनाए गए हैं। अभी तक इन्हें प्रति महीने 2500 रुपये वाहन भत्ता दिया जाता था। अब इसमें दो हजार रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। अब प्रत्येक एआरपी और एसआरजी को हर महीने 4500 रुपये वाहन भत्ता दिया जाएगा। वहीं डायट मेंटर को हर महीने अब 1000 रुपये की बजाए 2000 रुपये भत्ता दिया जाएगा।
विद्यार्थियों को परिषदीय स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए ये एआरपी और एसआरजी, शिक्षकों की मदद करते हैं। यह विद्यालयों का भ्रमण कर शिक्षकों को पाठ्य सामग्री और टीएलएम इत्यादि तैयार करने में मदद करते हैं। यही नहीं शैक्षिक वीडियो तैयार कराने, जनपद स्तर पर कार्यशाला आयोजित कराने और राज्य स्तरीय सम्मेलन के लिए शैक्षिक भ्रमण करते हैं। छात्र-छात्राओं को कक्षा में पढ़ाया जा रहा पाठ ढंग से समझ में आए और उनका शैक्षिक स्तर पर बढ़ाया जाए इसमें भी एआरपी-एसआरजी मदद करते हैं। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों और डायट के शिक्षकों में से ही इन्हें चुना जाता है।
करीब छह साल के बाद इनके वाहन भत्ते में बढ़ोत्तरी की गई है। इसकी जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। 22 अक्टूबर 2019 को निर्धारित किए गए वाहन भत्ते को बढ़ाया गया है। भत्ता बढ़ने से अब एआरपी-एसआरजी को काफी सहूलियत होगी। स्कूलों का भ्रमण करना उनके लिए अब पहले से आसान हो जाएगा।
कितनी है संख्या?
हर ब्लॉक में छह एआरपी हैं और इसमें एक डायट मेंटर भी शामिल है। ऐसे में इनकी कुल संख्या 4956 है। वहीं हर जिले में तीन-तीन एसआरजी की तैनाती की गई है। ऐसे में इनकी कुल संख्या 225 है। एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर की कुल संख्या 5181 है। यही नहीं टीएलएम निर्माण के लिए 500 रुपये प्रति महीने की दर से धनराशि भी दी जाएगी।




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