यूपी के 10 जिलों में 50 हजार करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टियों के बैनामा में खेल, मची खलबली
उत्तर प्रदेश के 10 जनपदों में 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक की प्रॉपर्टियों के बैनामा में खेल हो गया है। सबसे अधिक अनियमितताएं आगरा और कानपुर मंडल में पाई गई हैं।

यूपी के 10 से अधिक जिलों में निबंधन विभाग ने बिना पैन कार्ड का ब्योरा भरे 30 लाख से अधिक मूल्य वाली करोड़ों की सम्पत्ति का बैनामा करवा दिया। 50 हजार करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टियों का बैनामा बिना सही ब्योरा भरे हुआ। सबसे अधिक खेल और अनियमितताएं आगरा, कानपुर मंडल में पाई गई हैं। आयकर विभाग ने राज्य सरकार से सूचना साझा की तो खलबली मच गई। इसी क्रम में इस माह से प्रत्येक रजिस्ट्री में पैन और आधार का विवरण अनिवार्य कर दिया गया। जांच अभी जारी है। प्रत्यक्षकर भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि कानपुर व आगरा मंडल में आयकर, सीबीआई ने जिन संपत्तियों को अटैच किया था, उनके भी बैनामे कर दिए गए।
मंगलवार को आयकर विभाग की ओर से प्रत्यक्ष कर भवन में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली से आए शीर्ष अधिकारियों ने अब तक की कार्रवाई का ब्योरा साझा किया। त्रिकुटा सभागार में आयकर के आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण के प्रधान महानिदेशक अमिताव ने अब तक की कार्रवाई के बारे में चार्टेड एकाउंटेंटों और बार के सदस्यों को विस्तार से बताया। कार्यक्रम का आयोजन आयकर निदेशक आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण लखनऊ के निदेशक एसएच उस्मानी ने किया। प्रधान महानिदेशक ने इस मौके पर बताया कि कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए एसएफटी, एस यानी वित्तीय लेन देन की फाइलिंग का क्या महत्व है। इसमें रिपोर्टिंग एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आयकर, सीबीआई की अटैच प्रॉपर्टी भी बेच डालीं
इस दौरान यह भी सामने आया कि कानपुर और आगरा मंडल के जिलों में भारी अनियमितता मिली। निबंधन कर्मियों ने उन प्रॉपर्टियों का भी बैनामा कर डाला जिनको आयकर, ईडी या सीबीआई ने अटैच किया हुआ था। बैनामा करने में पैन की जगह फार्म-16 का सहारा लिया गया। हैरत की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में फार्म 16 का ब्योरा ही पूरा नहीं मिल पाया।
हजारों करोड़ की बेनामी सम्पत्तियों की खरीद-फरोख्त
इस दौरान हजारों करोड़ रुपये मूल्य की बेनामी सम्पत्तियों की भी प्रदेश में खरीद फरोख्त हुई। यह सिलसिला सिर्फ कुछ जिलों तक सीमित नहीं था। गोंडा, बहराइच, सुलतानपुर और नेपाल की सीमा से सटे कई जिलों में भी यह पाया गया।
साढ़े तीन करोड़ की प्रॉपर्टी को 30 लाख बताया
इतना ही नहीं निबंधन के दौरान बड़े पैमाने पर राजस्व को भी चूना लगाया गया है। उदाहरण के लिए कानपुर में एक प्रॉपर्टी जिसकी कीमत 30 लाख आंकी गई थी वह साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की निकली। ऐसा यूपी के 20 से अधिक जिलों में किया गया है।
कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में नई दिल्ली आ सूचना एवं आपराधिक अन्वेषण के निदेशक प्रशासन उमेश भारती, लखनऊ की संयुक्त निदेशक सोनल सिंह, कानपुर के संयुक्त निदेशक एसके लाल, उप निदेशक विमलेश राय और आयकर अधिकारी चित्रसेन भी मौजूद रहे।




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