former dig and two employees sentenced to three years rigorous imprisonment fines verdict in recruitment bribery case पूर्व DIG और दो कर्मचारियों को तीन साल की कठोर सजा, जुर्माना भी लगा; भर्ती रिश्वतकांड में आया फैसला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पूर्व DIG और दो कर्मचारियों को तीन साल की कठोर सजा, जुर्माना भी लगा; भर्ती रिश्वतकांड में आया फैसला

सीबीआई ने 23 फरवरी 2009 को पूर्व डीआईजी विनोद शर्मा और अन्य पर एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन DIG ने आपराधिक साजिश रची थी। इसका उद्देश्य CRPF में सिपाही (सामान्य ड्यूटी) के उम्मीदवारों से अवैध उगाही करना था। वह बिचौलियों को भर्ती कार्यक्रम, पदों की जानकारी पहले उपलब्ध करा देते थे।

Sun, 29 March 2026 06:59 AMAjay Singh विधि संवााददाता, लखनऊ
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पूर्व DIG और दो कर्मचारियों को तीन साल की कठोर सजा, जुर्माना भी लगा; भर्ती रिश्वतकांड में आया फैसला

सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व डीआईजी विनोद शर्मा, दो अन्य कर्मियों सत्यवीर सिंह, तीरथ पाल चतुर्वेदी को सीआरपीएफ कांस्टेबल भर्ती से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर 1.2 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।

पत्रावली के मुताबिक सीबीआई ने 23 फरवरी 2009 को खुफिया इनपुट पर पूर्व डीआईजी विनोद शर्मा और अन्य पर एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन डीआईजी ने आपराधिक साजिश रची थी। इसका उद्देश्य सीआरपीएफ में सिपाही (सामान्य ड्यूटी) के उम्मीदवारों से अवैध उगाही करना था। जांच में पाया गया कि विनोद शर्मा बिचौलियों को भर्ती कार्यक्रम, पदों की जानकारी पहले उपलब्ध करा देते थे। बदले में बिचौलिए उम्मीदवारों को गारंटी चयन का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते थे। सीबीआई ने जांच के बाद 23 नवंबर 2010 और 16 जुलाई 2012 को आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। न्यायालय ने पूर्व डीआईजी के साथ-साथ सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार का दोषी पाया।

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कठोर कारावास के अलावा जुर्माना भी लगाया

17 साल पुराने सीआरपीएफ कांस्टेबल भर्ती से संबंधित रिश्वत के इस मामले में अदालत ने पूर्व उप महानिरीक्षक (डीआईजी) विनोद कुमार शर्मा ओर बल के दो कर्मचारियों सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी ठहराने के बाद उन्हें तीन साल की कठोर सजा के साथ ही उन पर कुल 1.2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सीबीआई ने इस मामले की गहनता से जांच की।

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सीबीआई ने जांच में पाया कि पूर्व डीआईजी ने सीआरपीएफ में आरक्षी (सामान्य ड्यूटी) पर भर्ती होने के इच्छुक उम्मीदवारों से रिश्वत लेने के लिए कुछ व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रची थी। सीबीआई ने मामला दर्ज होने के एक साल के अंदर 2010 में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। लंबी अदालती प्रक्रिया और सुनवाई के बाद कोर्ट ने अब इस मामले में पूर्व डीआईजी समेत तीन लोगों को तीन साल के कठोर कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।

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