फर्जी पोस्ट बहादुरी नहीं..., राजा भैया पर भानवी के संगीन आरोपों के बाद पहली बार बेटा आया सामने
यूपी के बाहुबली विधायक राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच चल रहे विवाद में पहली बार उनके बेटे शिवराज प्रताप सिंह की एंट्री हुई है। शिवराज प्रताप सिंह ने पूरे मामले में मां को दोषी ठहराया है। शिवराज प्रताप सिंह का रिएक्शन ऐसे समय आया है जब भानवी सिंह राजा भैया के खिलाफ पीएमओ पहुंच गई हैं।

यूपी में प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से विधायक बाहुबली रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के विवाद में पहली बार उनके बेटे शिवराज प्रताप सिंह का रिएक्शन आया है। शिवराज प्रताप सिंह का रिएक्शन ऐसे समय आया है जब भानवी सिंह ने राजा भैया के पास जनसंहारक हथियार होने का संगीन आरोप लगाया हैं। राजा भैया की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में कर दी है। शिवराज प्रताप सिंह ने पूरे मामले पर अपनी मां को ही कटघरे में खड़ा किया है। उन पर घर छोड़कर जाने, सौ करोड़ मांगने समेत कई आरोप लगाए हैं। राजा भैया और उनके भाई अक्षय प्रताप सिंह पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी भानवी सिंह ने कई आरोप लगाए थे। इन पोस्ट को लेकर भी उनके बेटे ने मां पर निशाना साधा और कहा कि फर्जी पोस्ट करना बहादुरी का काम नहीं है।
बता दें, राजा भैया और भानवी सिंह के दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटे राजा भैया और दोनों बेटियां भानवी सिंह के साथ रहती हैं। दोनों बेटों को कुछ समय पहले ही राजा भैया ने राजनीति में प्रवेश कराते हुए अपने दल की सदस्यता दी थी। बेटे ने भले ही पहली बार मां-पिता के मामले में रिएक्शन दिया है, लेकिन भानवी की बेटी पहले भी मां के पक्ष में बोलती रही हैं। अब बेटे शिवराज प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पिता के पक्ष में लिखा कि मैं पहली बार सोशल मीडिया पर इस विषय में पोस्ट कर रहा हूं और चाहूंगा कि इसके बाद इस विषय पर कुछ न लिखना पड़े।
मां ने बिना बताए घर छोड़ा, 100 करोड़ मांग रहीं
शिवराज प्रताप सिंह ने कहा कि हमारे मम्मा और दाऊ (भानवी सिंह और राजा भैया) करीब 10 वर्ष से अलग रह रहे हैं। उसके पहले कुछ वर्ष परिवार के बड़ों के कहने पर हम बच्चों की ख़ातिर दाऊ ने मम्मा के साथ एक छत के नीचे रहना स्वीकार किया। लेकिन दोनों में संबंध सामान्य नहीं थे। बाद में मम्मा ने दाऊ को बिना बताए घर छोड़ दिया और दिल्ली के मकान में जाकर रहने लगीं।
हम सब बड़े हो गए तो दाऊ ने कोर्ट में तलाक की अर्जी डाली। तभी से संपत्ति और रुपयों की चाह में मम्मा ने सोशल मीडिया से लेकर मीडिया और संबंधियों में दाऊ की badvertisement शुरू कर दी। बहुत दुखद है, लेकिन अधिक कहना सोशल मीडिया पर उचित नहीं। मैंने स्वयं दोनों के बीच mediation का प्रयास किया। इससे दोनों अपना-अपना जीवन आराम से जी सकें, लेकिन मेरी व मेरे भाई की इस पहल को हमारी मम्मा ने ठुकरा दिया। हमारे बाबा, आजी एवं परिवार के अन्य वरिष्ठ जनों ने भी अनेक प्रयास किया लेकिन हमारी मां ने किसी की बात नहीं सुनी। कोर्ट में उन्होंने कहीं 50 करोड़ रुपये तो कहीं उसके ऊपर से 100 करोड़ रुपये एक मुश्त मांगा है। इसके साथ ही 25 लाख रुपए प्रति माह अलग से मांग रही हैं।
मां के स्वभाग के चलते सभी परेशान
शिवराज प्रताप सिंह ने कहा कि इनके (भानवी सिंह के) इसी स्वभाव के चलते दाऊ ही नहीं, इनके अपने माता-पिता, सास-ससुर, चचेरे ममेरे भाई-बहन और यहां तक की हम दोनों भाई भी इनसे बात नहीं करते हैं। इनकी किसी से नहीं बनती है, लेकिन ये ‘महिला कार्ड’ और ‘विक्टिम कार्ड’ के ज़रिए लोगों को सोशल मीडिया पर भड़का रही हैं। जितने वर्ष ये यहां रहीं नौकरों को मारा पीटा। मुकदमे इन्होंने कई कर रखे हैं। उसे मुकदमे की तरह लड़ना चाहिए। सही ग़लत का फ़ैसला न्यायालय करेगा न कि सोशल मीडिया पर पोस्ट लाइक करने वाले पार्टी विशेष के लोग करेंगे।
इस वजह से पोस्ट लिखनी पड़ रही
दाऊ के बारे में पिछले दिनों बहुत कुछ कहा गया लेकिन ये बताना आवश्यक है कि दाऊ ने हम सबका अच्छा भरण पोषण किया, अच्छी शिक्षा दी, धर्म संस्कार और अपार स्नेह दिया। हमारे दाऊ ने इस विषय पर सार्वजनिक तौर पर अब तक कुछ नहीं कहा है और शायद कहेंगे भी नहीं, इसलिए मुझे लिखना पड़ रहा है। दुख इस बात का है कि हमारी मम्मा बदले की भावना में इतना बह गयी हैं कि उन्हें अपने बच्चों का भविष्य ख़ासकर बेटियों की शादी तक की चिंता नहीं है।
मां का एजेंडा कुछ और है
इनका एजेंडा कुछ और है और वह बाद में लोगों को पता चल ही जाएगा। इस प्रकार बेकार पोस्ट करने से एक भी केस में किसी प्रकार की मदद नहीं मिलेगी। ट्वीट करके हमारी मम्मा केवल दाऊ को बदनाम करना चाह रही हैं जिससे एक जन प्रतिनिधि के तौर पर उनकी छवि को हानि पहुंचे। दाऊ का जीवन एक खुली किताब है, पूरा कुंडा उनका परिवार है।
रही बात संपत्ति की तो हमारी मां के पास दाऊ से अधिक अचल संपत्ति है। उन्हें कहीं कोई ठोकर खाने की ज़रूरत नहीं है। आराम का जीवन जी रही हैं। कोर्ट में महंगे से महंगा वकील खड़ा कर रही हैं। कई वर्ष दाऊ से कहीं अधिक इनकम टैक्स भी भरा है। इस प्रकार बदनाम करने के लिए फर्जी पोस्ट करना कोई बहादुरी का काम नहीं है। अंत में शिवराज प्रताप ने अपील की कि आशा करता हूं कि मेरी इस पोस्ट के बाद वे अपनी ऊर्जा अदालत में मुकद्दमा लड़ने में लगाएंगी न की सोशल मीडिया पर।




साइन इन