स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बैलेंस आने के 2 घंटे में जोड़ना होगा बिजली कनेक्शन, नहीं तो देना होगा मुआवजा
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बैलेंस आने के 2 घंटे में बिजली कनेक्शन जोड़ना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित बिजली कंपनी को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा।

अगर स्मार्ट मीटर का बैलेंस ऋणात्मक होने की वजह से बिजली कटती है तो पर्याप्त राशि के रीचार्ज के दो घंटे के भीतर कनेक्शन स्वत: जोड़ना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित बिजली कंपनी को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा।
वर्ष 2019 के स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन (मुआवजा कानून) में इसकी व्यवस्था दी गई है। रेगुलेशन की धारा 16.11.1 के मुताबिक अगर किसी उपभोक्ता की बिजली आपूर्ति बिजली बिल के भुगतान न होने के कारण काटी गई है, तो उपभोक्ता द्वारा बकाया राशि जमा करने के बाद लाइसेंसी को तुरंत बिजली बहाल करनी होगी। जहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, वहां उपभोक्ता द्वारा रीचार्ज करने के 2 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल करना अनिवार्य है। अगर रीचार्ज के 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं जोड़ी जाती है, तो बिजली कंपनियों को ₹50 रुपये प्रतिदिन की दर से उपभोक्ताओं को आपूर्ति बहाली तक मुआवजा देना होगा।
पावर कॉरपारेशन ने मंगलवार को कहा था कि वह 13 मार्च से स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम लागू करेगा। इसके बाद ऋणात्मक बैलेंस वाले स्मार्ट मीटर धारकों की बत्त गुल हो सकती है। कॉरपोरेशन ने ऋणात्मक खाताधारकों से समय रहते भुगतान की अपील भी की है। स्मार्ट मीटर धारकों पर तकरीबन 1400 करोड़ रुपये बकाया हैं।
नियम अधूरा मानना गलत - उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने भी ऋणात्मक बैलेंस वाले उपभोक्ताओं से रीचार्ज की अपील की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी भी नियम को अधूरा मानना गलत है। केंद्र सरकार के जिस कानून से सभी घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में लगाए जा रहे हैं, उसी कानून में ग्रामीण और शहरी सभी उपभोक्तओं को 24 घंटे बिजली देने का भी प्रावधान है। बिजली न दिए जाने पर मुआवजे की भी व्यवस्था है। नियमों का पालन एकतरफा नहीं किया जा सकता।




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