गांव का नाम पसंद नहीं, परिवार सहित छोड़ दिया घर; CM से मिलने जिद पर हिरासत में युवक
गोरखपुर के रहने वाले श्याम तिवारी पिछले पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधानी का पर्चा भरा था। उसने अपने गांव वालों से वादा किया था कि चुनाव जितने पर गांव इस्लामपुर का नाम बदलवा देगा, लेकिन चुनाव हार गया। उसने गांववालों से वोट न देने का कारण पूछा तो गांव वालों ने उससे कह दिया कि नाम बदलेगा तब जिताएंगे।

गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के एक सिरफिरे को उसके गांव का नाम पसंद नहीं, इसके लिए चार साल से परिवार सहित घर छोड़ दिया। गांव की 98 प्रतिशत हिन्दू आबादी बताकर गांव नाम सीतारामपुर करने के लिए आईजीआरएस तक कर डाली। राजस्व संहिता में गांव का नाम नहीं बदलने का हवाला देकर अधिकारियों ने मामले का निस्तारण कर दिया तो सिरफिरा परिवार सहित घर छोड़ दिया। सोमवार को मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ कार्यालय पहुंच गया। बेवजह मिलने की जिद करने पर गौतमपल्ली थाना पुलिस गुलरिहा पुलिस से तफ्तीश कर सिरफिरे का शांति भंग में चालान कर दिया।
जिले के गुलरिहा क्षेत्र के इस्लामपुर निवासी श्याम तिवारी पिछले पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधानी का पर्चा भरा था। उसने अपने गांव वालों से वादा किया था कि चुनाव जितने पर गांव का नाम बदलवा देगा, लेकिन चुनाव हार गया। उसने गांववालों से वोट न देने का कारण पूछा तो गांव वालों ने उससे कह दिया कि नाम बदलेगा तब जिताएंगे।
इसके बाद तो वह गांव का नाम बदलवाने में पूरी तरह जुट गया। आलम यह है कि जब भी मौका मिलता गांव का नाम बदलवाने के लिए कुछ ना कुछ तरीका अपनाता। वर्ष 2024 में किए आईजीआरएस में लिखा कि ग्राम सभा में 98% हिंदू आबादी है। फिर भी हमारे ग्रामसभा का नाम इस्लामपुर है। इससे मै काफी आहत हुं और चार साल से परिवार लेकर बाहर रह रहा हूं।
गांव का नाम सीतारामपुर किया जाए। हालांकि राजस्व संहिता में ग्राम सभा का नाम परिवर्तन करने का कोई प्रावधान न होने का हवाला देकर आईजीआरस का निस्तारण कर दिया गया। श्याम तिवारी पिछले सप्ताह गांव के बाहर आया था और वापस कानपुर लौट गया। कानपुर से वह लखनऊ पहुंचकर गांव का नाम बदलवाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गया। वहां वह मुख्यमंत्री से मिलने की जिद पर अड़ गया। अधिकारियों ने समझाने की कोशिश की लेकिन अपनी जिद पर अड़ा रहा। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।




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