छोटी बहन से विवाद ने बिगाड़ा भाई का खेल, 20 साल से नौकरी कर रहे टीचर की नियुक्ति रद्द
मिर्जापुर में 20 साल से टीचर की नौकरी कर रहे एक व्यक्ति का छोटी बहन से विवाद बहुत ज्यादा महंगा पड़ गया है। छोटी बहन ने नौकरी के लिए किए गए भाई के फर्जीवाड़े की जानकारी थी। बहन ने इसकी शिकायत कर दी और भाई की नौकरी चली गई। गुरुवार को हाईकोर्ट ने भी नियुक्ति रद्द करने पर मुहर लगा दी।

मिर्जापुर में 20 साल से टीचर की नौकरी कर रहे एक व्यक्ति का छोटी बहन से विवाद बहुत ज्यादा महंगा पड़ गया है। छोटी बहन ने नौकरी के लिए किए गए भाई के फर्जीवाड़े की जानकारी थी। बहन ने इसकी शिकायत कर दी और भाई की नौकरी चली गई।ुगुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी नियुक्ति रद्द करने पर मुहर लगा दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों पर छल से प्राप्त नियोजन को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह पूरी प्रक्रिया को दूषित करता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने फर्जी दस्तावेजों पर सहायक अध्यापक पद पर प्राप्त नियुक्ति को रद्द करने के विरुद्ध दाखिल मिर्जापुर के कृष्णकांत की याचिका पर उसके वकील और बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को सुनने के बाद याचिका खारिज़ करते हुए दिया है।
याची की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत मार्च 1998 में हुई थी। 20 साल से नौकरी कर रहे कृष्णकांत का अपनी छोटी बहन स्नेहलता से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इस पर स्नेहलता ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की कि कृष्णकांत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की है।
बहन की शिकायत पर तत्काल भाई कृष्णकांत के खिलाफ जांच शुरू हो गई। जांच में बहन के आरोप सही पाए गए। इसके बाद जुलाई में कृष्णकांत की सेवा समाप्त कर दी गई। सेवा समाप्ति के आदेश के खिलाफ राहत पाने के लिए कृष्णकांत इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गए।
हाईकोर्ट से भी कृष्णकांत को झटका लगा। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि छल के आधार पर नियुक्ति को संवैधानिक संरक्षण प्रदान नहीं किया जा सकता। ऐसा व्यक्ति अपने पक्ष में किसी राहत की उम्मीद नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस तरह का व्यक्ति वेतन प्राप्त करने का हकदार भी नहीं है।




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