Dismissal solely on technical grounds after long service unjust High Court quashes all government orders लंबी सेवा के बाद सिर्फ तकनीकी आधार पर बर्खास्तगी अनुचित, हाईकोर्ट ने रद्द किए सरकार के सभी आदेश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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लंबी सेवा के बाद सिर्फ तकनीकी आधार पर बर्खास्तगी अनुचित, हाईकोर्ट ने रद्द किए सरकार के सभी आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों को सिर्फ तकनीकी आधार बताकर सेवा समाप्त करना अनुचित है। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया।

Mon, 13 April 2026 10:44 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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लंबी सेवा के बाद सिर्फ तकनीकी आधार पर बर्खास्तगी अनुचित, हाईकोर्ट ने रद्द किए सरकार के सभी आदेश

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों को सिर्फ तकनीकी आधार बताकर सेवा समाप्त करना अनुचित है। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया और शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह आदेश दिया।

गौतमबुद्ध नगर स्थित राम सिंह विश्व चैतन्य कन्या जूनियर हाईस्कूल में वर्ष 2006 में दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई। 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया लेकिन बाद में 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया।

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2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा मिल चुका है अनुमोदन

शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी किउनकी नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। जबकि राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं।

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शिक्षकों को बिना सुनवाई सेवा से हटाना न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता। शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद्द नहीं किया जा सकता। यदि कोई धोखाधड़ी नहीं है, तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025, 30.अगस्त 2025, एक सितंबर 2025 और आठ सितंबर 2025 के सभी आदेश रद्द कर दिए और शिक्षकों को सेवा जारी रखने और सभी वेतन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक सेवा करने के बाद केवल तकनीकी आपत्तियों के आधार पर नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।

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